सरोगेसी रेगुलेशन बिल (Surrogacy Regulation Bill) – 2018 (India)

Surrogacy Regulation Bill

सरोगेसी या किराए की कोख होना। सरोगेसी एक ऐसा साधन, तकनीक, जरिया या ऐसा एंग्रीमेंट होता है जो एक निसंतान दंपति और एक स्वस्थ महिला के बीच होता है। जिसके माध्यम से निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिल पाता है। आज के दौर में ये तकनीक निसंतान दंपतियों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। आमतौर पर सरोगेसी तकनीक का उपयोग उन दंपतियों के लिए किया जाता है। जो लोग खुद की संतान चाहते है, बार-बार गर्भपात होने की स्थिति या आईवीएफ (In Vitro Fertilisation – IVF) के फेल होने की वजह से संतान सुख से वंचित हैं। वो सरोगेसी के जरिए पुरूष के स्पर्म को एक स्वस्थ महिला के गर्भ में 9 महीनों तक रखा जाता है। जिसके बाद संतान के जन्म के बाद महिला संतान को निसंतान दंपति को सौंप देती है।

सरोगेसी की प्रक्रिया

सरोगेसी की प्रक्रिया में सबसे पहले निसंतान दंपति, जो बार-बार गर्भपात या आईवीएफ  (In Vitro Fertilisation – IVF) के फेल होने पर ही इस तकनीक या साधन का उपयोग कर सकते हैं। इसके बाद एक अस्पताल और डॉक्टर की परमिशन से ही इस तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है।

अस्पताल और डॉक्टर की मदद से ही सरोगेसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। सरोगेसी में अपनी संतान की चाहत रखने वाले दंपति एक अन्य मानसिक और शारीरिक स्वस्थ महिला को इस प्रक्रिया के लिए चुना जाता है।

जिसमें उसे पुरूष के स्पर्म को अपने गर्भ(कोख) में 9 महीनों तक रखना होता है। 9 महीने बाद बच्चे के जन्म के बाद जहां निसंतान दंपति को संतान मिलती है, तो वहीं सरोगेसी करने वाली महिला को पहले से तय की गई एक निश्चत राशि दी जाती है।

भारत में सरोगेसी

सरोगेसी पहले भारत के लिए एक अनजान तकनीक थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से सरोगेसी में काफी उछाल देखा गया है।

भारत में  सरोगेसी की शुरूआत सर्वप्रथम  गुजरात (Gujrat) से हुई थी| जहां एक 65-70 साल की महिला ने अपनी बेटी के बच्चे को 9 महीने कोख में रखने के बाद जन्म दिया था|

सरोगेसी तकनीक या प्रक्रिया का भारत में धीरे-धीरे दुरूपयोग और व्यवासायिककरण बढ़ गया|

भारत में सरोगेसी कानून

भारत में सरोगेसी करवाना दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बेहद सस्ता और आसान है| इस वजह से अब भारत प्रजनन पर्यटन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है| भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने साल 2002 में सरोगेसी को जरूरी दिशा-निर्देशों के साथ कानूनी वैधता दे दी थी। जबकि 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले तिजारती नामक महिला को सरोगेसी की सर्वप्रथम दी थी|

भारत में लगभग 3000 से अधिक सरोगेसी क्लीनिक काम कर रहे हैं| जिनके मुताबिक सरोगेसी व्यवसाय की कीमत 400 मिलियन अमरीकी डॉलर से भी अधिक है|

भारत में सरोगेसी बिल

भारत में सबसे पहले सरोगेसी बिल सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 को लाया गया था। जबकि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने साल 2002 में ही सरोगेसी को कुछ जरूरी दिशा-निर्देशों के साथ कानूनी वैधता दे दी थी। इसके अलावा साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हए पहली बार सरोगेसी को देश में मान्यता दी थी। इसके बाद सरोगेसी में ग्रामीण,आदिवासी और गरीब महिलाओं के शोषण,दुरूपयोग और व्यवासायिककरण की वजह से इस सरकार को इसके लिए कानून बनाया गया।

साल 2016 में सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 लाया गया, लेकिन वो कभी पारित नहीं हो पाया था। साल 2018 में एक बार फिर सरकार ने लोकसभा में सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 के प्रावधानों को सख्त बनाते हुए सदन में पेश किया। जिसके बाद लोकसभा में सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 पास हो गया।

सरोगेसी रेगुलेशन बिल – 2018

सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2018 के मुताबिक…अब महिलाएं अपनी कोख को बेच नहीं सकेगीं। इसके साथ ही जीवन में एक ही बार सरोगेट मदर बन पाएगी। केवल शादीशुदा दंपति और 5 साल तक निसंतान रहने वाले दंपित ही सरोगेसी तकनीक का उपयोग कर पाएगें। केवल भारतीय दंपति ही इसके लिए आवेदन  कर पाएगें| इसके प्रमुख बिंदु निम्न है –

  1. व्यवासायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध|
  2. सिंगल, अविवाहित पुरुष या महिला, समलैंगिक, लिव इन में रहने वाला जोड़ा सरोगेसी के लिए आवेदन नही कर सकता|
  3. केवल 25 से 35 साल की महिला ही सरोगेट बन सकती है,इसके लिए  करीबी रिश्तेदार होना जरूरी|
  4. सरोगेट माँ बनने के लिए महिला का विवाहित और एक बच्चे की मां होना जरूरी|
  5. अंडाणु या स्पर्म देने पर प्रतिबंध|
  6. सरोगेसी के बदले धन देने या मौद्रिक लाभ नहीं दिया जा सकेगा, इसे केवल परोपकार माना जाएगा|
  7. केवल मानसिक और शारीरिक स्वस्थ महिला ही सरोगेसी करने के लिए मान्य होगी। अब पहले से संतान सुख ले चुके दंपति, सरोगेसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सरोगेसी केन्द्र पर ही आवेदन कर सकेगें।
  8. सरोगेसी के लिए बनाए गए प्रावधानों का उल्लंघन करने पर बिल में 10 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है|

सरोगेसी बिल – 2016

सरोगेसी को नियंत्रित करने के लिए सरकार सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 संसद में लाई थी।

जिसके मुताबिक अविवाहित पुरुष या महिला, सिंगल, समलैंगिक, लिव इन रहने वाला जोड़ा सरोगेसी के लिए मान्य नहीं होगा।

इसके अलावा निसंतान दंपति के रिश्तेदार ही केवल सेरोगेसी के जरिए मां बन सकती थी।

सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 के बिल के बाद भी सेरोगेसी के दुरूपयोग और व्यवासायिककरण का बढ़ना सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया था।

सरोगेसी का खर्च

भारत में सरोगेसी की अनुमानित लागत लगभग $ 20,000 और $ 30,000 के बीच होती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए, तो अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया ($120,000 से), कनाडा, रूस और यूक्रेन जैसे देशों की तुलना में बेहद सस्ता है, हालांकि सरोगेसी में शामिल लोगों को कुल खर्च का केवल ($ 5,900-9,400) डॉलर ही मिल पाता है|

यहां ये बात ध्यान देने वाली है, कि देश में कुल जनसंख्या का तीसरा हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे रहता है|

 

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