हुमायूँ – Humayun (1530-1556 ई.)

जन्म – 6 मार्च 1508 ई. (काबुल) माता – पिता – माहम बेगम, बाबर मूल नाम – नसीरुद्दीन महमूद राज्याभिषेक – 6 दिसंबर 1530 (आगरा) शासक बनने के पश्चात हुमायूँ ने अपने साम्राज्य का विभाजन अपने भाइयों में कर दिया जो उसकी सबसे बड़ी भूल थी | अपने पिता की इच्छानुसार हुमायूँ ने अस्करी को

बाबर – Babar (1526-1530 ई.)

भारत में मुग़ल वंश का संस्थापक बाबर था | बाबर पिता की ओर से “चग़ताई तुर्क” तथा माता की ओर से “मंगोल वंश” से सम्बंधित था| अपने पिता की अकस्मात् मृत्यु के बाद बाबर मात्र 12 वर्ष की आयु में फरगना का शासक बना | किन्तु बाबर के द्वारा लिखित अपनी आत्मकथा में उसने स्वयं

बहमनी राज्य का प्रशासन (Administration of Bahmani Empire)

केंद्रीय  प्रशासन –  शासन का प्रधान सुलतान था जो निरंकुश और स्वेच्छाचारी शासक होता था, जो  केंद्रीय प्रशासन सामान्यत: 8 मंत्रियों के सहयोग से संचलित किया जाता था | वकील-उस- सल्तनत – यह प्रधानमंत्री था। सुल्तान के सभी आदेश उसके द्वारा ही पारित हात थे | अमीर-ए-जुमला – यह वित्तमंत्री था |  वजीर-ए-अशरफ – यह

बहमनी साम्राज्य – Bahmani Empire (1347-1527 ई०)

बहमनी साम्राज्य की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक के काल में अलाउद्दीन हसन  बहमन  शाह (हसन गंगू) ने की थी | इस वंश के शासकों ने लगभग 180 वर्ष (1347-1527) ई०  तक शासन किया | जो क्रमानुसार निम्नलिखित है – अलाउद्दीन हसन  बहमन  शाह , मुहम्मद शाह, मुजाहिद शाह, मुहम्मद शाह द्वितीय, गयासुद्दीन, ताजुद्दीन फिरोज शाह,

UPPSC Pre Exam Solved Paper (General Studies) – 2018

UPPSC  (Uttar Pradesh Public Service Commission) द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Examination) – 2018 का हल (Solved) सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र (General Studies – 1st Paper) Exam – UPPSC Pre – 2018 Subject –  General Studies – Ist Paper Number Of Questions – 150 Date of Exam – 28/October/2018  1. 14 जून से 15 जुलाई

कुली बेगार आन्दोलन (Kuli Begar Movement)

इस प्रथा में व्यक्ति को बिना पारिश्रमिक दिए कुली का काम करना पड़ता था  इसी कारण इसे  कुली बेगार (Kuli Begar) कहा जाता था | विभिन्न ग्रामों के ग्राम प्रधानो (पधानों) का यह दायित्व था, कि वह एक निश्चित अवधि के लिये, निश्चित संख्या में  शासक वर्ग (अंग्रेज़ो) को कुली उपलब्ध कराएगा। इस कार्य के

गयासुद्दीन बलबन – Ghiyas ud din Balban (1266 – 1287 ई.)

गयासुद्दीन बलबन का वास्तविक नाम बहाउदीन था तथा इलबारी तुर्क था| बलबन ने सत्ता प्राप्त करने के पश्चात एक नए राजवंश बलबनी वंश (द्वितीय इल्बारी वंश) की स्थापना की| बलबन को बाल्यकाल में ही मंगोलों द्वारा दास के रूप में बेच दिया| इसके पश्चात ख्वाजा जमालुद्दीन अपने अन्य दासों के साथ बलबन को भी  दिल्ली

Upper caste reservations: सवर्णों को 10% आरक्षण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

लोकसभा चुनाव से पहले BJP सरकार के, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामान्य श्रेणी (General Category) में “आर्थिक रूप से पिछड़े – Economically Backward” वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में 10% आरक्षण को मंजूरी दी है। Read in English : Upper caste reservations (उच्च जाति आरक्षण) मोदी सरकार द्वारा सवर्णों को आरक्षण देने के

भक्ति आंदोलन (Bhakti Movement)

भारत में  भक्ति आंदोलन का विकास 7वीं और 12वीं शताब्दी के मध्य सर्वप्रथम दक्षिण भारत के तमिलनाडु में हुआ, इसका उल्लेख तमिल ग्रन्थ तिरुमुरई तथा प्रबंधंम में मिलता है | 8वीं  शताब्दी में तमिल प्रदेश में नयनार (शिव भक्त) एवं अलवर (विष्णु भक्त) द्वारा भक्ति मार्ग के माध्यम से शैव और वैष्णव धर्म को अत्यधिक

भक्ति और सूफी आन्दोलन का महत्त्व

भक्ति आन्दोलन एक सामाजिक धार्मिक आंदोलन था जिसने धार्मिक और सामाजिक कठोरता का विरोध किया|  भक्ति आन्दोलन में अच्छे चरित्र और शुद्ध विचार पर बल दिया गया। ऐसे समय में जब समाज निष्क्रिय हो गया था, भक्ति संतों ने नए जीवन और शक्ति का संचार किया|  इन आंदोलनों ने विश्वास की एक नई भावना जागृत
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