बिहार के भौगोलिक प्रदेश का वर्गीकरण

संरचना एवं उच्चावच की भिन्नता के आधार पर बिहार को मुख्यत: तीन भागों में विभाजित किया सकता है। शिवालिक पर्वतीय प्रदेश, गंगा का मैदान छोटानागपुर सीमांत पठारी प्रदेश बिहार की क्षेत्रीय प्राकृतिक विविधता, उच्चावच में असमानता, भूमि की विषमता, मिट्टी एवं वनस्पति की विविधता का आधार है। किसी विस्तृत क्षेत्र की संपूर्ण जानकारी को समरूपता

बिहार की भौतिक विशेषताएँ (उच्चावच)

बिहार  में अनेक प्रकार की भौतिक विविधताएँ जैसे – पर्वत, पठार और मैदान सभी प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। यद्यपि बिहार का अधिकांश भू-भाग मैदानी क्षेत्र है, किन्तु उत्तर में स्थित शिवालिक पर्वत श्रेणी तथा दक्षिण में  संकीर्ण पठारी क्षेत्र विविधता उत्पन्न करते हैं। भौतिक दृष्टि के आधार पर बिहार को 3 भौतिक (प्राकृतिक)

बिहार के प्रमुख लोकनृत्य (Bihar’s major folk dance)

बिहार में लोकनृत्यों का भी अत्यधिक महत्व है। यहाँ सभी पर्वों, जैसे—संस्कार, पर्व और मनोरंजन इत्यादि पर लोकनृत्यों को किया हटा है इन लोकनृत्यों से आपसी सौहार्द और एकता का भाव भी जागृत होता है। राज्य के निम्नलिखित नृत्य उल्लेखनीय हैं करमा नृत्य  बिहार की आदिवासी जनजातियों में करमा नृत्य मुख्य रूप से प्रचलित है। 

बिहार की प्रमुख जनजाति (Major Tribe’s of Bihar)

बिहार से विभाजित होकर नया राज्य बनने के पश्चात  झारखंड में  जनजातियों की संख्या बहुत कम हो गई, किन्तु  कुछ जनजातियों अभी भी हैं, जो बिहार की समृद्ध सामाजिक संस्कृति को अपनी प्राचीन संस्कृति से योगदान देती हैं। बिहार में पाए जानेवाली प्रमुख जनजातियाँ निम्नलिखित हैं गोंड यह जनजाति बिहार के छपरा, चंपारण और रोहतास

बिहार के प्रमुख लोकनाट्य (Bihar’s major folk drama)

बिहार के लोकनाट्यों का जनजीवन में काफी महत्वपूर्ण स्थान है। इन नाटयों में अभिनय, संवाद, कथानक, गीत तथा नृत्यों का अत्यधिक महत्व  हैं। इन्हें सांस्कृतिक और मांगलिक अवसरों पर दक्ष कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। बिहार में प्रचलित लोकनाट्यों का वर्णन निम्नलिखित है – जट-जटिन यह लोकनाट्य एक जट और उसकी पत्नी (जटिन) के

बिहार के प्रमुख लोकगीत (Major folksong of Bihar)

भारत में क्षेत्रीयता के आधार पर लोकगीतों का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। प्रत्येक राज्य में लोकगीतों की अलग-अलग परंपरा रही है। यह लोकगीतों  पर्व-त्योहार, शादी-विवाह, जन्म, मुंडन, जनेऊ आदि अवसरों पर गाए जाते हैं। इन लोकगीतों में अंगिका लोकगीत प्राकृतिक सौंदर्य का तथा  मगही लोकगीत पारिवारिक संबंधों का वर्णन करते हैं।बिहार में भोजपुरी लोकगीतों को

प्राचीन बिहार में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन

ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) के अंतिम चरण में सामाजिक जीवन में कई प्रकार की कुरीतियों आने लगीं। ऋगवेद के दसवें मंडल के पुरुष सूक्त में पहली बार वर्ण-व्यवस्था का उल्लेख हुआ है, जो उत्तर-वैदिक काल का अंत होते-होते अपने जटिल स्वरूप में आ गयी। छठी सदी तक छुआछूत जैसे कुरीतियाँ कठोर रूप ग्रहण कर चुकी

महात्मा गांधी शांति पुरस्कार विजेता (Mahatma Gandhi Peace Prize Winner) 2015-18

केंद्र सरकार ने 16 जनवरी, 2019 को पिछले चार वर्षों के लिए गांधी शांति पुरस्कार की घोषणा की है। 2015 से 2018 तक केंद्र सरकार के शांति पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की गई थी। 2014 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को सम्मानित किया गया था यह पुरस्कार सालाना दिया जाता है, हालांकि

बिहार का प्राक्-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल

बिहार में मानव सभ्यता के इतिहास को मुख्यत: दो भागों में विभाजित किया जा सकता है  प्राक्-ऐतिहासिक काल  ऐतिहासिक काल प्राक्-ऐतिहासिक काल प्राक्-ऐतिहासिक काल से सम्बंधित आदि मानव के निवास के साक्ष्य बिहार के कुछ स्थानों से लगभग 1 लाख वर्ष पूर्व के मिले हैं। ये साक्ष्य पुरापाषाण युग के हैं। जो नालंदा और मुंगेर

बिहार इतिहास के स्रोत (Sources of Bihar history)

बिहार का इतिहास अत्यंत ही समृद्ध एवं वैभवशाली रहा है। संस्कृतियों और धर्मों के अद्भुत समन्वय ने इस भूमि को विश्व के इतिहास में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है। बिहार के इतिहास के अध्ययन से संबंधित अनेक प्रकार के स्रोत उपलब्ध हैं। जिनमें  पुरातात्त्विक एवं साहित्यिक, दोनों प्रकार के स्रोत उपलब्ध हैं। बिहार इतिहास के पुरातात्विक
error: Content is protected !!