वर्षा के प्रकार

उत्पत्ति के आधार पर वर्षा को तीन प्रमुख प्रकारों में बाँटा जा सकता है- संवहनी वर्षा, (Vascular rain) पर्वतीय वर्षा (Mountain rain) चक्रवाती वर्षा (Cyclone rain) संवहनीय वर्षा (Vascular Rain) हवा गर्म हो जाने पर हल्की होकर संवहन धाराओं के रूप में ऊपर की ओर उठती है, वायुमंडल की ऊपरी परत में पहुँचने के बाद यह विस्तृत होती है

मौसम  और जलवायु – Weather & Climate

मौसम  और जलवायु (Weather & Climate) – वायुमंडल में होने वाला अल्पकालिक परिवर्तन मौसम कहलाता है। मौसम में होने वाला दीर्घकालिक परिवर्तन  जलवायु कहलाता है जिसका प्रभाव एक विस्तृत शेत्र और पर्यावरण पर पढता है। तापमान वायु में मौजूद ताप एवं शीतलता के परिमाण को तापमान कहते हैं। वायुमंडल का तापमान केवल दिन और रात में ही नहीं बदलता बल्कि ऋतुओं

वायुमंडल की संरचना

वायुमंडल अलग-अलग घनत्व तथा तापमान वाली विभिन्न परतों (layers) का बना होता है। पृथ्वी की सतह के पास घनत्व अधिक होता है, जबकि ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ यह घटता जाता है। तापमान की स्थिति के अनुसार वायुमंडल को पाँच विभिन्न भागों में बाँटा गया है जो निम्न है :- क्षोभमंडल (Troposphere) समतापमंडल (Stratosphere,) मध्यमंडल (Mesosphere) आयनमंडल

वायुमंडल का संघटन

वायुमंडल (Atmosphere) अनेक गैस का एक मिश्रण है जिसमे ठोस और तरल पदार्थो के कण असमान मात्र में रहते है हमारे वायुमंडल में मात्रा के अनुसार, शुष्क हवा में 78.09% नाइट्रोजन (Nitrogen) गैस है जो पोधों और जीवो के विकास के लिए महत्वपूर्ण है , 20.95% ऑक्सीजन (Oxygen), 0.93% आर्गन (Argon – Ar), 0.04% कार्बन

ज्वालामुखी और ज्वालामुखी स्थलाकृतियाँ

ज्वालामुखी / क्रेटर (Crater) वह स्थान है जहाँ से निकलकर गैस, राख और तरल चट्टानी पदार्थ, लावा पृथ्वी के धरातल तक पहुँचता है। यदि यह पदार्थ कुछ समय पहले ही बाहर आया हो या अभी निकल रहा हो तो वह ज्वालामुखी सक्रिय ज्वालामुखी (active volcano) कहलाता है। तरल चट्टानी पदार्थ दुर्बलता मण्डल से निकलकर धरातल

प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics Theory)

सन् 1967 में मैकेंजी  (Mckenzie), पारकर (Parker) और मोरगन (Morgan) ने स्वतंत्रा रूप से उपलब्ध् विचारों को समन्वित कर अवधरणा प्रस्तुत की, जिसे ‘प्लेट विवर्तनिकी’ (Plate tectonics) कहा गया। एक विवर्तनिक प्लेट  ठोस चट्टान का विशाल व अनियमित आकार का खंड है, जो महाद्वीपीय व महासागरीय स्थलमंडलों से मिलकर बना है। ये प्लेटें दुर्बलतामंडल (Asthenosphere)

शैल एवं खनिज (Shell & Mineral)

पृथ्वी की पर्पटी अनेक प्रकार के शैलों से बनी है। पृथ्वी की पर्पटी बनाने वाले खनिज पदार्थ के किसी भी प्राकृतिक पिंड को शैल कहते हैं। शैल विभिन्न रंग, आकार एवं गठन की हो सकती हैं। निश्चित दशाओं में एक प्रकार की शैल चक्रीय तरीके से एक-दूसरे में परिवर्तित हो जाते हैं। एक शैल से

पृथ्वी की आंतरिक संरचना

पृथ्वी को इसकी बनावट और उसमें मिलने वाले खनिज तत्वों और गहराई के आधार पर मुख्यत: तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है भू-पर्पटी मैंटल क्रोडprithwi ka antarik bhag भू-पर्पटी (Earth Crust) यह ठोस पृथ्वी का सबसे बाहरी भाग है। यह बहुत भंगुर (Brittle) भाग है जिसमें जल्दी टूट जाने की प्रवृत्ति पाई जाती है।

भूकंप (Earthquake)

साधरण भाषा में भूकंप का अर्थ है – पृथ्वी का कंपन (Vibration)। यह एक प्राकृतिक घटना है। जिसमें ऊर्जा के निकलने के कारण तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो सभी दिशाओं में विस्तृत होकर भूकंप उत्पन्न करती है। कंपन  के कारण सामान्यतः भ्रंश के किनारे-किनारे ही ऊर्जा निकलती है। क्योंकि भू-पर्पटी (Earth Crust) की शैलों में गहन दरारें ही भ्रंश
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