नगरपालिका (Municipality)

भारत में नगरीय शासन प्रणाली को 74 वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अपनाया गया  | संघ स्तर पर नगरीय शासन प्रणाली का विषय निम्न 3 मंत्रालयों से संबंधित है – नगर विकास मंत्रालय (Ministry of urban development) रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) गृह मंत्रालय (Home Ministry) नगर निगमों  का संवैधानीकरण  राजीव गाँधी सरकार – नगर

पंचायती राज – (73 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1992)

पंचायती चुनावों का संवैधानीकरण  राजीव गाँधी सरकार – पंचायतों को संवैधानिक मान्यता दिलाने हेतु वर्ष 1989 में सरकार द्वारा विधेयक संसद में पेश किया गया जो लोकसभा में तो पारित हो गया किंतु राज्यसभा में पारित नहीं हो सका , क्योकिं  इसमें केंद्र   को मजबूत बनाने प्रावधान था | V.P सिंह सरकार – वर्ष 1990 में

उत्तराखंड महिला सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा – 2016 (Hindi)

01. ‘मनः + भाव’ किस शब्द का सन्धि-विच्छेद है A. मनोभाव B. मनभाव C. मनाभाव D. इनमें से कोई नहीं 02. जिन शब्दों के अर्थ में समानता हो, उन्हें᠁᠁ कहते है। A. विलोम शब्द B. पर्यायवाची शब्द C. अनेकार्थक शब्द D. (B) और (C) 03. अशुद्ध शब्द का चयन कीजिए। A. ऊतपात B. उत्पात C.

पंचायती राज का विकास

भारत में पंचायतों का गठन गांधीजी की संकल्पना पर आधारित है जिसमें उन्होंने राज्य में सबसे निचले स्तर पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन की बात कही थी| बलवंत राय मेहता समिति  वर्ष 1957 में भारत  सरकार द्वारा बलवंत राय मेहता की अध्यक्षता में सामुदायिक विकास कार्यक्रम 1952 तथा राष्ट्रीय विस्तार

केंद्र व राज्य के मध्य संबंधो की समीक्षा के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग

भारत में केंद्र तथा राज्य संबंधो की समीक्षा एवं  सहकारी संघवाद को क्रियान्वित करने के लिए समय – समय पर विभिन्न समिति व आयोगों का गठन किया गया , जिनमे से निम्न महत्वपूर्ण आयोग है – प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग  केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1966 में मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC

केंद्र और राज्य संबंध

संविधान में केंद्रीय व्यवस्था के अनुरूप केंद्र तथा राज्य संबंधों की विस्तृत विवेचना की गयी है अत: भारतीय एकता व अखंडता के लिए केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाया गया है |  केंद्र व राज्य के मध्य संबंधो का अध्यनन तीन दृष्टिकोण से किया जाता है – विधायी संबंध  अनु० (245-255) प्रशासनिक संबंध अनु० (256-263) वितीय संबंध अनु०

अधीनस्थ न्यायालय

भारतीय संविधान के भाग-6 में अनु० – 233 से 237 तक अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित है जो उच्च न्यायालय के अधीन होते है तथा इनका गठन राज्य अधिनियम कानून के द्वारा होता है | जिला न्यायाधीश की नियुक्ति जिला न्यायाधीश की नियुक्ति व पदोन्नति  राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से करता

उच्च न्यायलय की शक्तियां व क्षेत्राधिकार

उच्च न्यायालय को अपने अधीनस्थ न्यायालयों के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार है अत: उच्च न्यायालय राज्य में अपील करने का सर्वोच्च न्यायालय होता है | उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार निम्न लिखित है – मूल क्षेत्राधिकार  न्यायदेश (रिट) क्षेत्राधिकार  अपीलीय क्षेत्राधिकार  अभिलेखीय क्षेत्राधिकार  पर्यवेक्षीय क्षेत्राधिकार  अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण  न्यायिक समीक्षा  मूल क्षेत्राधिकार  इसके अंतर्गत

उच्च न्यायालय (High Court)

भारत में उच्च न्यायालय का गठन सर्वप्रथम 1862 में एक साथ तीन प्रान्तों कलकत्ता (Calcutta) , बंबई ( Bombay) व मद्रास (Madras) में  हुआ तथा 1866 में चौथे उच्च न्यायालय की स्थापना इलाहाबाद (Allahabad) में की गई | अत: स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1950 में प्रान्तों के उच्च न्यायालयों को राज्यों के उच्च न्यायालय में बदल दिया गया |  वर्तमान समय में देश में 24

उच्चतम न्यायालय की शक्तियां व क्षेत्राधिकार

भारतीय संविधान द्वारा उच्चतम न्यायालय को व्यापक शक्तियां व क्षेत्राधिकार प्रदान किए गए है । ब्रिटेन के उच्च सदन (House of Lords) की तरह भारत में उच्चतम न्यायालय को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्राप्त है जिसे निम्न वर्गों में वर्गीकृत किया गया है — मूल / आरंभिक क्षेत्राधिकार अपीलीय क्षेत्राधिकार परामर्शी / सलाहकारी क्षेत्राधिकार न्यायिक समीक्षा
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