मध्य प्रदेश – बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ (Multipurpose River Valley Projects)

दो या दो से अधिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए निर्मित नदी घाटी परियोजनाओं को बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना कहते है। इनका उपयोग  सिंचाई, पेयजल, जल विद्युत, वन संरक्षण, भूमि संरक्षण, मत्स्य पालन, पर्यटन विकास, रोजगार तथा नौका परिवहन आदि के लिए किया जाता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा नदी घाटी परियोजनाओं को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ की संज्ञा दी थी।

चंबल नदी घाटी परियोजना chambal river valley project

यह मध्य प्रदेश की प्रथम बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है, जिसका निर्माण वर्ष 1953-54 मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। चंबल नदी परियोजना का लाभ उन क्षेत्रों को मिलता है, जहाँ वर्षा का औसत वार्षिक वर्षा 60 से 75 Cm के मध्य या इससे कम होती है।

चंबल नदी घाटी परियोजना के अंतर्गत निर्मित प्रमुख बांध राणा प्रताप सागर बांध (चित्तौड़गढ़), जवाहर सागर बांध (कोटा) एवं गांधी सागर बांध (नीमच/मंदसौर) हैं। इसके द्वारा मध्य प्रदेश के ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर आदि जिलों में सिंचाई की जाती है।

नर्मदा घाटी परियोजना 

नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों पर स्थित परियोजना को नर्मदा नदी घाटी परियोजना के नाम से जाना जाता है। यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात की एक संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना है। जो निम्न है –

narmada multipurpose river valley project

रानी अवंतीबाई सागर (बरगी) परियोजना 

नर्मदा नदी पर स्थित रानी अवंतीबाई सागर परियोजना मध्य प्रदेश की एक बहुउद्देशीय परियोजना है। जिसका निर्माण कार्य वर्ष 1971 में  शुरु किया गया। इस परियोजना में 100 मेगावाट की जल विद्युत उत्पादन क्षमता भी हैं।

बरगी बांध मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर निर्मित प्रथम बांध है। जिसके निर्माण में समग्र मिट्टी एवं चिनाई (मेसनरी) का प्रयोग किया गया है।  इस परियोजना से लाभान्वित होने वाले प्रमुख जिले जबलपुर एवं नरसिंहपुर हैं।

तवा परियोजना 

तवा नदी का उद्गम पंचमढ़ी के समीप स्थित महादेव की पहाड़ियों से होता है तथा होशंगाबाद के समीप यह नर्मदा नदी में समाहित हो जाती है। तवा नदी पर ही मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में रानीपुर गाँव के समीप लगभग 58 मी. ऊँचा बांध निर्मित किया गया है।

इंदिरा सागर परियोजना 

नर्मदा नदी पर स्थित “इंदिरा सागर परियोजना” मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना है, जो भारत में सर्वाधिक जल भंडारण क्षमता (12.22 Bm cube) रखती हैं। इस परियोजना की जल विद्युत उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट तथा इसके द्वारा लगभग 2 लाख 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित किया जाता है । “इंदिरा सागर परियोजना” की नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने रखी थी। जो मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है।

“इंदिरा सागर परियोजना” के जल से अन्य महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं को लगातार जल आपूर्ति की जाती है। जो निम्न हैं  

  • महेश्वर परियोजना,
  • ओंकारेश्वर परियोजना
  • सरदार सरोवर परियोजना

ओंकारेश्वर परियोजना  

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मांधाता के निकट ओंकारेश्वर परियोजना स्थित हैं। जो नर्मदा नदी के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाओं में से एक है। ओंकारेश्वर परियोजना की जल विद्युत उत्पादन क्षमता 520 मेगावाट है।

महेश्वर परियोजना 

मध्य प्रदेश के गर्गोंन जिले में मंडलेश्वर के निकट महेश्वर परियोजना स्थित है, जो ओंकारेश्वर परियोजना में लगभग 40 Km दूरी पर स्थित हैं। महेश्वर परियोजना की जल विद्युत उत्पादन क्षमता  400 मेगावाट हैं।

मान परियोजना 

मध्य प्रदेश के धार जिले में जरीबाद गाँव के समीप मान परियोजना स्थित है। मान नदी का उद्गम मध्य प्रदेश में स्थित सतपुडा पर्वत से होता है। मान परियोजना से लाभान्वित होने वाले धार जिले की प्रमुख तहसीले आदिवासी बहुल मनावर और गंधवानी है।  मान परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 46 मैट्रिक टन मछली उत्पादन होता है, जिसकी लगभग 13 करोड रू० वार्षिक आय होती है।

जोबट बांध परियोजना 

नर्मदा नदी की सहायक नदी हथिनीं पर जोबट बांध (चंद्रशेखर परियोजना) स्थित हैं। जो मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी घाटी में बनने वाले 30 प्रमुख बांधों में से एक है ।

कोलार परियोजना 

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के लावाखेड़ी ग्राम में कोलार परियोजना स्थित है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1978-79 के मध्य की गई। जिसका निर्माण नर्मदा को सहायक कोलार नदीं पर किया गया है।

सरदार सरोवर परियोजना 

सरदार सरोवर परियोजना भारत की एक वृहत परियोजनाओं है। जिससे लाभान्वित होने वाले राज्य  मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं। वर्ष 1961 में पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा सरदार सरोवर बांध की आधारशिला रखी गयी थी। इस परियोजना की जल विद्युत उत्पादन क्षमता  1450 मेगावाट है, जिसमें मध्य प्रदेश का भाग 57%, गुजरात का भाग 16% तथा महाराष्ट्र का भाग 27% रहेगा।

सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 163 मी. है, जो भारत का तीसरा सबसे ऊँचा बांध है। सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन 17 सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया।

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