बिहार राज्य में प्रमुख आयोग

राज्य निर्वाचन आयोग

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 के अंतर्गत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य में पंचायतों व नगरपालिकाओं के चुनाव का संचालन कराने हेतु एक संवैधानिक संस्था है। इस आयोग का प्रमुख राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है, जिसकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती हैं।

  • पंचायतों व नगरपालिकाओं  के निर्वाचन हेतु निर्वाचक नामावली तैयार कराना,
  • चुनाव का सफल संचालन
  • निर्देशन एवं नियंत्रण का अधिकार राज्य निर्वाचन आयोग को प्राप्त है।
  • राज्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया के सामन है।

बिहार मानवाधिकार आयोग

राज्य स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु 3 जनवरी, 2000 को बिहार मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई थी तथा पुनः 26 जून, 2008 को इसका पुनर्गठन किया गया। जम्मू-कश्मीर और राजस्थान उच्च न्यायालय के भूतपूर्व न्यायाधीश श्री एस.एन. झा को बिहार मानवाधिकार आयोग के प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

बिहार मानवाधिकार आयोग की शक्तियों का स्रोत मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष केवल भारत के किसी उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को ही नियुक्त किया जा सकता है।

राज्य मानवाधिकार आयोग के प्रमुख कार्य  जैसे – मानवाधिकार का उल्लंघन, पुलिस उत्पीड़न, अभिरक्षा (Custodial) मृत्यु, मुठभेड़ में मृत्यु, पुलिस, अन्य पदाधिकारी या लोक सेवक द्वारा व्यक्तियों को परेशान करने संबंधित मामलों, दहेज की माँग, बलात्कार, हत्या, लैगिक प्रताड़ना, महिलाओं पर अत्याचार एवं अप्रतिष्ठा, बाल मजदूर और बँधुआ मजदूर, बाल विवाह, समुचित शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित करना, गरीबी उन्मूलन तथा सामाजिक सुरक्षा संबंधी कार्यक्रम, आदि में आयोग संज्ञान लेता है।

राज्य महिला आयोग

राज्य  में महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और कल्याण हेतु राज्य महिला आयोग का गठन किया गया है। महिलाओ को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने हेतु जिला स्तर पर विभिन्न तरीके से कार्यक्रमों का आयोजन आयोग द्वारा किया जाता है।

राज्य महिला आयोग में एक अध्यक्ष तथा 7 अन्य सदस्य होते है, जिनकी नियुक्ति  राज्य सरकार द्वारा की जाती है। 7 सदस्यों में एक सदस्य अनुसूचित जाति, एक अनुसूचित जनजाति, एक अल्पसंख्यक समुदाय, एक पिछड़ी जाति, एक विधि एवं विधान का अनुभव रखने वाला, एक किसी स्वयंसेवी संस्था का अनुभव रखनेवाली एवं एक समाज कल्याण के क्षेत्र में अनुभवी महिला को नियुक्त किये जाने का  प्रावधान है।

बिहार लोक सेवा आयोग

अनुच्छेद 315 के अंतर्गत भारत में राज्यों के लिए राज्य लोक सेवा आयोग के गठन करने का प्रावधान किया गया है। बिहार लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अप्रैल, 1949 को की गयी। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या अधिकतम 62 वर्ष की उम्र (जो पहले पूर्ण हो) होता है। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति मंत्रिपरिषद् की सलाह पर राज्यपाल के द्वारा की जाती है। बिहार लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष राजधारी सिन्हा थे।

बिहार कर्मचारी चयन आयोग

बिहार राज्य के अधिनियम संख्या-7/2002 के द्वारा वेतनमान 6500 से 10500 (पंचम वेतन आयोग) के नीचे के वर्ग 3 के अराजपत्रित पदों पर नियुक्ति के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग का गठन किया गया है। इसके गठन के साथ ही विद्यालय सेवा बोर्ड का इसमें विलय कर दिया गया। इसमें अध्यक्ष एवं दो सदस्यों का पद सृजित है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के सचिव स्तरीय अधिकारी अध्यक्ष के रूप में तथा वर्ग-1 के विभिन्न पदाधिकारियों का सदस्य के रूप में राज्य सरकार मनोनयन करती है।

Note :

बिहार में सर्वप्रथम लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्रीधर वासुदेवा सोहनी को नियुक्त किया गया , जिनका कार्यकाल 28 मई,1971 ई. से 27 मई, 1978 ई. तक रहा। 

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