यूरोप में औद्योगिक क्रान्ति (Industrial Revolution in Europe)

औद्योगिक क्रान्ति से तात्पर्य है कि उत्पादन की पद्धति परिवर्तन। औद्योगिक क्रान्ति परिवर्तनों की एक सतत श्रृंखला है। सर्वप्रथम “लुई ब्लों” नामक समाजवादी विचारक ने मुहावरे के तौर पर इस शब्द का प्रयोग किया। औद्यागिक क्रान्ति ने न केवल आर्थिक जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन किया बल्कि सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक जीवन को भी व्यापक तौर पर प्रभावित किया।

Industrial Revolution in Europe

ब्रिटिश औद्योगिक क्रान्ति 

ब्रिटिश औद्योगिक क्रान्ति के कारण : 

कृषि क्षेत्र में परिवर्तन: 18वीं सदी के पूर्वाद्ध में कृषि क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। जैसे – बड़े कृषि फार्मों का विकास, बीज उगाने का यंत्र (JethroTull Scientist), फसलों में परिवर्तन कर कृषि आदि। इससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई तथा अतिरिक्त उत्पादन ने क्रान्ति का मार्ग प्रशस्त किया।

जनसंख्या वृद्धि : 18वीं सदी के उत्तरार्द्ध में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई। जिसका  मुख्य कारण – खाद्यान्नों की उपलब्धता, चिकित्सा में सुधार आदि। इसी अवधि में पश्चिमी यूरोप के लगभग 19 शहरों की आबादी दुगुनी हो गई। जिनमे से 11 शहर ब्रिटेन में से थे।

व्यापार : पुनर्जागरण के पश्चात वैश्विक व्यापार के युग की शुरुआत हुई। 18 सदी तक इसका सर्वाधिक लाभ ब्रिटेन का हुआ। ब्रिटेन में बड़ी मात्रा में पूँजी का संचय तथा उपनिवेशों की स्थापना में औद्योगीकरण  में आधार का कार्य किया। 16वीं से 18वीं सदी के मध्य पश्चिमी यूरोप में व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। जैसे – सुदूरवर्ती व्यापार, समुद्री मार्गों से व्यापार, बैंकों की स्थापना, व्यापारिक कम्पनियों की स्थापना इत्यादि। इन अर्थों में व्यापारिक क्रान्ति शब्द का प्रयोग किया जाता है।

परिवहन : इस काल में परिवहन के क्षेत्र में भी क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए। ब्रिटेन के सभी प्रमुख शहरों को नहरों से जोड़ा गया। 1800 ई. तक 4000 मील तक नहरों का निर्माण किया गया। 19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में पक्की सड़कें (McDome) एवं रेलवे (Railway) का प्रयोग भी प्रारम्भ हुआ। 1830 में सर्वप्रथम लीवरपुल से मैनचेस्टर के बीच रेलवे का व्यावसायिक संचालन प्रारम्भ हुआ। लाभ: राष्ट्रीय बाजार का निर्माण, आधारभूत उद्योगों का विकास, आयात-निर्यात में वृद्धि।

राजनीतिक स्थिति : यूरोपीय राष्ट्रों की तुलना में ब्रिटेन राजनीतिक रूप से अत्यधिक स्थिर रहा है। ब्रिटेन में स्थापित एक समान प्रशासनिक व्यवस्था, मुद्रा एवं कानून के प्रचलन ने आर्थिक गतिविधियों के विकास में योगदान दिया तथा  सरकारी नीतियों ने भी उत्प्रेरक का कार्य किया। जैसे – उपनिवेश की स्थापना, अहस्तक्षेप की नीति, मुक्त व्यापार की नीति इत्यादि।

सामाजिक स्थिति : ब्रिटिश समाज, यूरोपीय समाज की तुलना में अत्यधिक  प्रगतिशील रहा है। राजतंत्र से लोकतंत्र की ओर संक्रमण, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मध्य एवं निम्न वर्ग को समाहित किए जाने सम्बन्धित कार्य इत्यादि। इसी प्रकार आर्थिक फायदे के लिए व्यापारियों के साथसाथ जमींदारों ने भी उद्योगों में निवेश किया।

आर्थिक कारण : 

  • विकसित बैंकिंग ढांचा : 1695 ई. में बैंक ऑफ इग्लैण्ड (Bank of England) की स्थापना हुई तथा 1800 ई. तक लगभग 300 क्षेत्रीय बैंक ब्रिटेन में सक्रिय थे।
  • प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता
  • बड़ी मात्रा में पूंजी की उपलब्धता।

प्रौद्योगिकी (Technology) : प्रौद्योगिकी के विकास ने भी औद्योगिक परिवर्तनों को व्यावहारिक रूप प्रदान किया। ब्रिटेन के डर्बी परिवार (Darbi Family) ने लोहे को मनचाहा आकार देने की प्रौद्योगिकी का विकास किया। प्रथम चरण में सर्वाधिक विकास कपड़ा उद्योग क्षेत्र में देखा गया।

  • स्पिनिंग जेनी : हाग्रीब्स
  • वाटर फ्रेम : आराइट
  • पावर लूम : कार्टराइट
  • फ्लाईंग शटल : जॉन के
  • जेम्सवाट: इन्होंने उद्योगों में इन्जना का प्रयोग प्रारम्भ किया।
  • स्टीफेंसन: रेलवे में इंजन का प्रयोग।

औद्योगिक क्रान्ति के परिणाम 

आर्थिक परिणाम : उत्पादन पद्धति में परिवर्तन, उद्योगों में मशीनों का प्रयोग, कृषि में मशीनों का प्रयोग, परिवहन के क्षेत्र में क्रान्तिकारी बदलाव, शहरों की संख्या में वृद्धि आदि। औद्योगिकीकरण के कारण एक और जहाँ रोजगार के नए अवसर सृजित हुए वहीं दूसरी तरफ प्रतिस्पर्धा उद्योग बन्द हुए तथा बेरोजगारों की संख्या भी बढी, शहर रोजगार के प्रमुख केन्द्र के रूप में स्थापित  हुए।

सामाजिक परिणाम : उद्योगपति एवं श्रमिकों के रूप में समाज में दो नए वर्गों का उदय हुआ।

  • संसाधनों पर नियंत्रण के कारण उद्योगपतियों के जीवन स्तर में वृद्धि।
  • मजदूरों की दयनीय दशा जैसे- कम वेतन, रोजगार की असुरक्षाआदि।
  • महिलाओं एवं बच्चों का शोषण।
  • रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की तरफ लोगों का स्थानान्तरण।
  • भावनात्मक सम्बन्धों एवं रक्त सम्बन्धों से अधिक व्यावसायिक सम्बन्धों को महत्त्व।

राजनीतिक परिणाम : ब्रिटिश राजनीति में भी महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए। लोकतांत्रिक सुधारों के लिए सरकारों पर दबाव बनाया गया। 1832 के संसदीय अधिनियम द्वारा ब्रिटिश राजनीति में मध्यवर्ग को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ।

श्रमिकों के द्वारा भी राजनीतिक अधिकारों के लिए चार्टिस्ट आन्दोलन (Chartist movement) चलाया गया। संसदीय राजनीति में हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons) के महत्व में वृद्धि हुई।

विचारों के स्तर पर: औद्योगिक क्रान्ति के पश्चात् उदारवादी विचारधारा का जन्म हुआ । राजनीतिक क्षेत्र में इसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं का समर्थन किया तथा आर्थिक क्षेत्र में अहस्तक्षेप (laissez faire) की नीति का पालन।

श्रमिकों की दयनीय दशा के कारण समाजवादी विचारधारा का जन्म हुआ। रॉबर्ट ओयन जैसे प्रारम्भिक समाजवादियों ने श्रमिकों की दशा में सुधार के लिए कदम उठाए।

अन्य देशों में औद्योगिकीकरण 

जर्मनी में औद्योगीकरण 

  • राज्य एवं बैंक की महत्त्वपूर्ण भूमिका।
  • रसायन एवं बिजली उद्योग का बड़े पैमाने पर विकास।

रूस में औद्योगिकीकरण 

  • विदेशी पूँजी की भूमिका
  • पश्चिमी रूस का सर्वाधिक औद्योगिकीकरण
  • भारी उद्योगों पर बल
  • रूसी क्रान्ति के पश्चात् नियोजित औद्योगिक विकास।

जापान में औद्योगिकीकरण

  • राज्य के द्वारा उद्योगों में निवेश
  • कुछ महत्वपूर्ण परिवारों का उद्योगों पर नियंत्रण
  • प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण औद्योगिक विकास बहुत हद तक आयात-निर्यात पर निर्भर।

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