Category: Polity

राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission)

राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission) एक गैर – संवैधानिक (Non Constitunioal) किंतु सांविधिक निकाय (Statutory body) निकाय है , जिसका गठन  संसद द्वारा पारित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (1993) के द्वारा किया गया| वर्तमान में देश के 24 राज्यों  में आयोग के मुख्यालय है | राज्य मानवाधिकार आयोग केवल उन्हीं मामलों की जाँच कर सकते है जो

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National human rights commission)

  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) एक गैर – संवैधानिक (Non Constitunioal) किंतु सांविधिक निकाय (Statutory body) निकाय है , जिसका गठन 1993 में संसद द्वारा पारित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (1993) के अंतर्गत किया गया तथा वर्ष 2006 में इस अधिनियम को पुन: संशोधित किया गया | संरचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय

नीति आयोग (NITI Aayog)

नीति आयोग एक गैर – संवैधानिक निकाय (Non-Constitutional Body) है , इसकी स्थापना 1 Jan 2015 को नीति आयोग ( National Institute of Transforming India – NITI ) की स्थापना योजना आयोग के उत्तराधिकारी के रूप में की गयी | कार्य नीति आयोग भारत सरकार का एक ” थिंक टैंक “ है, जो भारत सरकार की

भाषाई अल्पसंख्यक आयोग (Linguistic Minority Commission)

भारतीय संविधान में भाषाई अल्पसंख्यक (Linguistic minority) वर्गों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं था , किंतु राज्य पुनर्गठन आयोग (State reorganization commission) 1953-1955 की सिफ़ारिशों के आधार पर संसद द्वारा 7 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1956 के द्वारा संविधान के भाग -17 में अनु०- 350 B जोड़ा गया | जिसमें इसके कार्यों व गठन संबंधित निम्न

राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General of State)

भारतीय संविधान के अनु०- 165 के अंतर्गत राज्य के  महाधिवक्ता पद की व्यवस्था की गयी है जो राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है, तथा राज्य सरकार को विधि संबंधी सलाह देता है | नियुक्ति राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General of State) की नियुक्ति मंत्रीपरिषद की सलाह पर राज्यपाल द्वारा की जाती  है तथा   उसे किसी भी

भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India)

भारतीय संविधान के अनु०- 76 के अंतर्गत भारत के महान्यायवादी पद की व्यवस्था की गयी है जो देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है, तथा भारत सरकार को विधि संबंधी सलाह देता है | नियुक्ति भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India) की नियुक्ति मंत्रीपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती  है तथा   उसे किसी भी

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)

भारतीय संविधान के अनु०- 148 के अंतर्गत नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor General of India) की व्यवस्था की गयी है , जो अपने कार्यों के लिए संसद के प्रति उत्तरदायी होता है | नियंत्रक व महालेखा परीक्षक , केंद्र व राज्य दोनों स्तर पर लोक वित्त का संरक्षक होने के साथ-साथ देश की वित्तीय व्यवस्था का

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

भारतीय संविधान के अनु० – 338 A के अंतर्गत एक संवैधानिक राष्ट्रीय जाति अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया है | इसके अतिरिक्त अन्य राष्ट्रीय आयोग जैसे – राष्ट्रीय महिला आयोग (1992) , राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (1993) , राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (2007) आदि संवैधानिक आयोग ना होकर सांविधिक / वैधानिक (Statuory) आयोग है जिनकी स्थापना

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

भारतीय संविधान के अनु० – 338 के अंतर्गत एक संवैधानिक राष्ट्रीय जाति अनुसूचित आयोग का गठन किया गया है | इसके अतिरिक्त अन्य राष्ट्रीय आयोग जैसे – राष्ट्रीय महिला आयोग (1992) , राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (1993) , राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (2007) आदि संवैधानिक आयोग ना होकर सांविधिक / वैधानिक (Statuory) आयोग है जिनकी स्थापना संसद के

वित्त आयोग (Finance Commission)

वित्त आयोग का गठन संविधान के अनु० – 280 के अंतर्गत किया गया है , यह एक अर्द्ध – न्यायिक निकाय है जिसका गठन प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल में या आवश्यकतानुसार उनसे पूर्व भी किया जा सकता है | संरचना  वित्त आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है , जिसमें
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