Category: Polity

भारत का संवैधानिक विकास (1858 -1935 तक)

भारत शासन अधिनियम (1858)  1857 के विद्रोह के बाद भारत शासन अधिनियम (1858) को पारित किया गया जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर गवर्नरों, क्षेत्रों और राजस्व संबंधी शक्तियाँ ब्रिटिश राजशाही को सौंप दीं। भारत का शासन सीधे महारानी विक्टोरिया के अधीन चला गया। गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर भारत का वायसराय करते हुए

भारत का संवैधानिक इतिहास (Constitutional History of India)

  • कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 के अंतर्गत की गई ! • कलकत्ता सर्वोच्च न्यायलय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे ! • भारत में कंपनी के अधिकृत प्रदेशों को पहली बार ब्रिटिश अधिकृत प्रदेशों का नाम 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट के अंतर्गत दिया गया ! •

भारत में संविधान का विकास (1793 – 1853 A.D)

रेग्युलेटिंग एक्ट (Regulating Act) 1773 इस अधिनियम के द्वारा भारत में पहली बार कंपनी के कार्यों को नियमित व नियंत्रित किया गया | इसके द्वारा भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी गयी तथा कंपनी के राजनैतिक व प्रशासनिक कार्यों को मान्यता मिली | गवर्नर जनरल को सलाह देने हेतु 4 सदस्यों की एक कार्यकारिणी

भारत में चुनाव सुधार (Election Reforms in India)

1996 के पहले चुनाव सुधार  मतदान की आयु को कम करना – 61 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1988 के अंतर्गत मत देने की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी | प्रस्तावकों की संख्या में वृद्धि – 1988 में राज्यसभा व विधान परिषद् के लिए नामांकन पत्रों पर प्रस्तावक के रूप में कुल निर्वाचकों

दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law)

भारतीय संविधान में 52 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1985 के द्वारा सांसदों तथा विधायकों के एक दल से दूसरे दल में परिवर्तन की स्थिति में उन्हें संसद अथवा विधानमंडल में अयोग्यता हेतु प्रावधान किया गया है , इसके लिए भारतीय संविधान में 10 वीं अनुसूची को जोड़ा गया | पुन: 91 वें संविधान संसोधन अधिनियम –

अधिकरण (Tribunal’s)

भारतीय संविधान में 42 वें संविधान संसोधन अधिनियम – 1976 के अंतर्गत एक नया भाग – 14A अधिकरण जोड़ा गया | जिसके अंतर्गत दो अनु० है – अनु०- 323 A (प्रशासनिक अधिकरण) अनु० – 323 B (अन्य मामलों से संबंधित अधिकरण) प्रशासनिक अधिकरण (Administrative tribunal) अनु०- 323 A के अंतर्गत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि

राजभाषा (Official Langauge)

भारतीय संविधान के भाग – 17 के अंतर्गत अनु० – 343 से 351 तक राजभाषा से संबंधित है , जिसे 4 भागों में विभाजित किया गया है — संघ की भाषा क्षेत्रीय भाषा न्यायपालिका व विधि पाठ की भाषा अन्य विशेष निर्देशों की भाषा संघ की भाषा   भारतीय संविधान में संघ की भाषा से संबंधित

लोकपाल एवं लोकायुक्त

विश्व के विभिन्न देशों ने भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए निम्नलिखित संस्थाएं सृजित की है – Ombudsmen प्रणाली प्रशासनिक न्यायालय प्रणाली Proqurator प्रणाली Parliamentary Commission of Investigation विश्व में कुशासन व भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए ओम्बुड्समैन (Ombudsman) सबसे पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था है , जिसका जन्मदाता स्वीडन (Sweden) है जिसने इसकी

केंद्रीय व राज्य सूचना आयोग

केंद्रीय व राज्य सूचना आयोग (Central and state information commission) एक सांविधिक निकाय (Statutory body) है , जिसकी स्थापना वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI – Right to Information) के अंतर्गत की गयी , इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति द्वारा केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कार्यरत कार्यालयों तथा सार्वजनिक मामलों से संबंधित जानकारी

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central vigilance commission)

संसद द्वारा बनाई गयी संथानम समिति (1962-64) की सिफ़ारिशों के आधार पर भ्रष्टाचार (Corruption) को रोकने के लिए वर्ष 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central vigilance commission) का गठन किया गया | मूलत: यह आयोग न तो संवैधानिक संस्था थी न ही सांविधिक संस्था , इसे Sept – 2003 संसद द्वारा पारित अधिनियम के अंतर्गत सांविधिक दर्जा प्रदान
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