Category: Polity

भारत का संवैधानिक इतिहास (Constitutional History of India)

  • कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 के अंतर्गत की गई ! • कलकत्ता सर्वोच्च न्यायलय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे ! • भारत में कंपनी के अधिकृत प्रदेशों को पहली बार ब्रिटिश अधिकृत प्रदेशों का नाम 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट के अंतर्गत दिया गया ! •

भारत में संविधान का विकास (1793 – 1853 A.D)

रेग्युलेटिंग एक्ट (Regulating Act) 1773 इस अधिनियम के द्वारा भारत में पहली बार कंपनी के कार्यों को नियमित व नियंत्रित किया गया | इसके द्वारा भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी गयी तथा कंपनी के राजनैतिक व प्रशासनिक कार्यों को मान्यता मिली | गवर्नर जनरल को सलाह देने हेतु 4 सदस्यों की एक कार्यकारिणी

भारत में चुनाव सुधार (Election Reforms in India)

1996 के पहले चुनाव सुधार  मतदान की आयु को कम करना – 61 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1988 के अंतर्गत मत देने की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी | प्रस्तावकों की संख्या में वृद्धि – 1988 में राज्यसभा व विधान परिषद् के लिए नामांकन पत्रों पर प्रस्तावक के रूप में कुल निर्वाचकों

दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law)

भारतीय संविधान में 52 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1985 के द्वारा सांसदों तथा विधायकों के एक दल से दूसरे दल में परिवर्तन की स्थिति में उन्हें संसद अथवा विधानमंडल में अयोग्यता हेतु प्रावधान किया गया है , इसके लिए भारतीय संविधान में 10 वीं अनुसूची को जोड़ा गया | पुन: 91 वें संविधान संसोधन अधिनियम –

अधिकरण (Tribunal’s)

भारतीय संविधान में 42 वें संविधान संसोधन अधिनियम – 1976 के अंतर्गत एक नया भाग – 14A अधिकरण जोड़ा गया | जिसके अंतर्गत दो अनु० है – अनु०- 323 A (प्रशासनिक अधिकरण) अनु० – 323 B (अन्य मामलों से संबंधित अधिकरण) प्रशासनिक अधिकरण (Administrative tribunal) अनु०- 323 A के अंतर्गत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central vigilance commission)

संसद द्वारा बनाई गयी संथानम समिति (1962-64) की सिफ़ारिशों के आधार पर भ्रष्टाचार (Corruption) को रोकने के लिए वर्ष 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central vigilance commission) का गठन किया गया | मूलत: यह आयोग न तो संवैधानिक संस्था थी न ही सांविधिक संस्था , इसे Sept – 2003 संसद द्वारा पारित अधिनियम के अंतर्गत सांविधिक दर्जा प्रदान

राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission)

राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission) एक गैर – संवैधानिक (Non Constitunioal) किंतु सांविधिक निकाय (Statutory body) निकाय है , जिसका गठन  संसद द्वारा पारित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (1993) के द्वारा किया गया| वर्तमान में देश के 24 राज्यों  में आयोग के मुख्यालय है | राज्य मानवाधिकार आयोग केवल उन्हीं मामलों की जाँच कर सकते है जो

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National human rights commission)

  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) एक गैर – संवैधानिक (Non Constitunioal) किंतु सांविधिक निकाय (Statutory body) निकाय है , जिसका गठन 1993 में संसद द्वारा पारित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (1993) के अंतर्गत किया गया तथा वर्ष 2006 में इस अधिनियम को पुन: संशोधित किया गया | संरचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)

भारतीय संविधान के अनु०- 148 के अंतर्गत नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor General of India) की व्यवस्था की गयी है , जो अपने कार्यों के लिए संसद के प्रति उत्तरदायी होता है | नियंत्रक व महालेखा परीक्षक , केंद्र व राज्य दोनों स्तर पर लोक वित्त का संरक्षक होने के साथ-साथ देश की वित्तीय व्यवस्था का

केंद्र व राज्य के मध्य संबंधो की समीक्षा के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग

भारत में केंद्र तथा राज्य संबंधो की समीक्षा एवं  सहकारी संघवाद को क्रियान्वित करने के लिए समय – समय पर विभिन्न समिति व आयोगों का गठन किया गया , जिनमे से निम्न महत्वपूर्ण आयोग है – प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग  केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1966 में मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC