Category: History

इल्तुतमिश – Illtutmish (1210 – 1236 ई.)

पूरा नाम‎: ‎शम्स-उद-दीन इल्तुत्मिश उत्तराधिकारी‎: ‎रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह, रजिया राजवंश‎: ‎ममलूक सल्तनत (दिल्ली) मृत्यु – खोखरो के विद्रोह के दमन के समय 1236 ई. में मृत्यु हो गई। इल्तुतमिश इल्बरी जनजाति का तुर्क तथा ऐबक का दास था। इसका असली नाम ‘अलतमश’ था। खोखरों के विरुद्ध इल्तुतमिश की कार्य कुशलता से प्रभावित होकर मुहम्मद ग़ोरी ने उसे ‘अमीरूल उमरा’ नामक महत्त्वपूर्ण पद तथा

कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ई०)

भारत में दिल्ली सल्तनत का प्रथम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ई०) था। इसी को भारत में ममलूक/दास/गुलाम  वंश का संस्थापक कहा जाता है| किन्तु दिल्ली सल्तनत के वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश (1211-1236 ई०) को माना जाता है।   शासनकाल  – 1206 – 1210 ई. राज्यारोहण – मुहमंद गौरी की मृत्यु के बाद 25 जून 1206 ई. को  लाहौर (Lahore) में हुआ| राज्यारोहण

मुहम्मद गौरी (1173-1206)

11वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध एवं 12वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत में तुर्कों ने आक्रमण किया| भारत में तुर्की आक्रमण के नेतृत्वकर्ता महमूद ग़ज़नवी  (971-1030) और मुहम्मद गौरी थे| मुहम्मद गौरी मुहम्मद गौरी , ग़ज़नवी साम्राज्य के अधीन गौर नामक राज्य का शासक था, जो एक अफगान योद्धा था| मुहम्मद गौरी 1173 ई. में गौर का शासक बना| इस समय मथुरा  के उत्तर-पश्चिम में पृथ्वीराज और

भारत पर अरबों के आक्रमणों के प्रभाव

632 ई. में हजरत मुहम्मद की मृत्यु के बाद मात्र 6 वर्षों में ही उनके उत्तराधिकारियों ने सीरिया (Syria) , उत्तरी अफ्रीका (North Africa)  स्पेन (Spain) तथा ईरान (Iran) पर विजय प्राप्त कर ली थी| अरबों ने भारतीय सीमा पर भी आक्रमण पर भी जल तथा थल दोनों मार्गों आक्रमण किए, लेकिन उनको 712 ई. तक

महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण

महमूद गजनवी (Mahmoud Ghaznavi) के भारत पर किए गए आक्रमण के संदर्भ में विद्वानों में मतभेद है| हेनरी इलियट के अनुसार  1000 से 1027 ई० के मध्य  में महमूद ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया| प्रथम आक्रमण (1000 ई०) —  महमूद गजनवी का प्रथम आक्रमण 1000 ई० में हिन्दुशाही राज्य के सीमावर्ती नगरों पर हुआ

महमूद गजनवी के आक्रमण के समय भारत की स्थिति

किसी भी देश पर आक्रमण करने से पूर्व उसकी राजनीतिक ,आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त होना अति आवश्यक है, इस समय भारत में राजनैतिक एकता का आभाव शासकों में आपसी द्वेष था ,  इस स्थिति का लाभ उठाकर महमूद ग़ज़नवी (Mahmood Ghaznavi ) ने धन प्राप्ति के लिए भारत पर आक्रमण करना

मुगल कालीन इतिहास के स्रोत

मुगल कालीन इतिहास के अध्ययन के लिए निम्नलिखित स्रोत महत्वपूर्ण हैं  — बाबरनामा (तुजके-बाबरी) —   यह बाबर की आत्मकथा है जिसे उसने तुर्की भाषा (Turkish language) में लिखा था| बाद में इसका कई भाषाओं में अनुवाद हुआ – सर्वप्रथम मैडम बैवरीज द्वारा इसका मूल तुर्की भाषा से अंग्रेजी अनुवाद किया गया| अब्दुर्ररहीम खाना-खाना ने 1598-90 ई० में इसका फारसी भाषा अनुवाद किया| इसका उर्दू अनुवाद मिजा

मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत (दिल्ली सल्तनत)

मध्यकालीन भारत के इतिहास के अध्ययन के लिए पुरातात्विक स्रोत (Archaeological sources) व साहित्यिक स्रोत (Literary sources) प्रमुख हैं| इस काल  में इतिहास की रचनाएं, शासको की जीवनियां, प्रशासन संबंधी रचनाएं, साहित्यिक कृतियां व यात्रियों के यात्रा वृतान्त प्रमुख हैं। प्राचीन काल में भारत में क्रमबद्ध इतिहास लिखने की परम्परा  विकसित करने का श्रेय तुर्क और