Category: History

बहमनी साम्राज्य – Bahmani Empire (1347-1527 ई०)

बहमनी साम्राज्य की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक के काल में अलाउद्दीन हसन  बहमन  शाह (हसन गंगू) ने की थी | इस वंश के शासकों ने लगभग 180 वर्ष (1347-1527) ई०  तक शासन किया | जो क्रमानुसार निम्नलिखित है – अलाउद्दीन हसन  बहमन  शाह , मुहम्मद शाह, मुजाहिद शाह, मुहम्मद शाह द्वितीय, गयासुद्दीन, ताजुद्दीन फिरोज शाह,

गयासुद्दीन बलबन – Ghiyas ud din Balban (1266 – 1287 ई.)

गयासुद्दीन बलबन का वास्तविक नाम बहाउदीन था तथा इलबारी तुर्क था| बलबन ने सत्ता प्राप्त करने के पश्चात एक नए राजवंश बलबनी वंश (द्वितीय इल्बारी वंश) की स्थापना की| बलबन को बाल्यकाल में ही मंगोलों द्वारा दास के रूप में बेच दिया| इसके पश्चात ख्वाजा जमालुद्दीन अपने अन्य दासों के साथ बलबन को भी  दिल्ली

भक्ति आंदोलन (Bhakti Movement)

भारत में  भक्ति आंदोलन का विकास 7वीं और 12वीं शताब्दी के मध्य सर्वप्रथम दक्षिण भारत के तमिलनाडु में हुआ, इसका उल्लेख तमिल ग्रन्थ तिरुमुरई तथा प्रबंधंम में मिलता है | 8वीं  शताब्दी में तमिल प्रदेश में नयनार (शिव भक्त) एवं अलवर (विष्णु भक्त) द्वारा भक्ति मार्ग के माध्यम से शैव और वैष्णव धर्म को अत्यधिक

भक्ति और सूफी आन्दोलन का महत्त्व

भक्ति आन्दोलन एक सामाजिक धार्मिक आंदोलन था जिसने धार्मिक और सामाजिक कठोरता का विरोध किया|  भक्ति आन्दोलन में अच्छे चरित्र और शुद्ध विचार पर बल दिया गया। ऐसे समय में जब समाज निष्क्रिय हो गया था, भक्ति संतों ने नए जीवन और शक्ति का संचार किया|  इन आंदोलनों ने विश्वास की एक नई भावना जागृत

फिरोजशाह तुगलक – Firoz Shah Tughlaq (1351 -1388ई.)

मूल नाम – कमालुद्दीन फिरोज उपाधि/पदवी – सैयद उस सलातीन खलीफा का नाइब ( स्वयं द्वारा) जन्म – 1309ई.मे (हिंदू माता के गर्भ से ) फिरोजशाह तुगलक की माता- अबोहर के भट्टी राजपूत रणमल की पुत्री थी फिरोज तुगलक का राज्याभिषेक दो बार हुआ प्रथम राज्याभिषेक – 22 मार्च 1351 को थट्टा सिंध में दूसरा

सैय्यद वंश — Sayyid dynasty (1414-1451 ई.)

सैय्यद वंश, दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाला चौथा वंश था| सैय्यद वंश ने कुल 37 वर्षों तक दिल्ली पर शासन किया| इस वंश में कुल 4 शासक हुए – ख़िज़्र खाँ (1414 – 1421 ई.) मुबारक़ शाह (1421 – 1434 ई.) मुहम्मद शाह (1434 – 1445 ई.) आलमशाह शाह (1445 – 1476 ई.) ख़िज़्र

परवर्ती तुगलक शासक – Later Tughlaq Ruler (1388 – 1412 ई.)

गयासुद्दीन तुगलक शाह II  – Gaiusuddin Tughlaq Shah II (1388 ई.) फ़िरोज़ शाह तुगलक की मृत्यु के  बाद दिल्ली सल्तनत में  का पौत्र तुगलक शाह ,  गियासुद्दीन तुगलक शाह – II की उपाधि धारण कर शासक बना किंतु  5 माह के अल्प शासनकाल के बाद उसकी हत्या कर दी गयी | अबू बक्र – (1389-90 ई.)

मुहम्मद बिन तुग़लक़ – Muhammad bin Tughlaq (1325-51 ई.)

मूल नाम – मलिक फख्रुद्दीन (जूना खॉ) उपाधि – अमीर-उल-मोमिनीन, जिल्लिलाहा(सिक्कों पर) ,मुहम्मद बिन तुगलक, उलूग ख़ाँ (गयासुद्दीन तुगलक द्वारा प्रदत्त)   ग़यासुद्दीन तुग़लक़ की मृत्यु के बाद उसका पुत्र ‘जूना ख़ाँ’, मुहम्मद बिन तुग़लक़ (1325-1351 ई.) की उपाधि धारण कर दिल्ली की गद्दी पर बैठा| दिल्ली सल्तनत में सबसे अधिक लंबे समय तक शासन

गयासुद्दीन तुगलक – Ghiyasuddin Tughlaq (1320-25 ई.)

उपाधि – गाजी (काफिरों का वध करने वाला) , मलिक-उल-गाज़ी (मंगोलो को पराजित करने के कारण) इंद्रप्रस्थ के निकट गाजी मलिक और  नासिरुद्दीन खुसरो शाह के सेनाओं के मध्य युद्ध हुआ, जिसमे नासिरुद्दीन खुसरो पराजित हुआ व उसकी हत्या कर दी गयी | नासिरुद्दीन खुसरो की मृत्यु के बाद अमीरों के आग्रह पर गाजी मलिक

नासिरुद्दीन खुसरो शाह – Nasiruddin Khusro Shah (1320 ई.)

उपाधि – पैगम्बर का सेनापति मुबारक शाह खिलजी की हत्या के बाद खुसरों खां , नासिरुद्दीन खुसरो शाह की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा तथा अपने नाम के ख़ुत्बे पढ़वाएं और सिक्के ढलवाएँ | नासिरुद्दीन खुसरो शाह हिन्दू धर्म से परिवर्तित होकर मुसलमान बना था| मृत्यु  इंद्रप्रस्थ के निकट गाजी मलिक और नासिरुद्दीन खुसरो