Category: Geography

प्रायद्वीपीय नदियाँ

प्रायद्वीपीय भारत में मुख्य जल विभाजक का निर्माण पश्चिमी घाट द्वारा होता है, जो पश्चिमी तट के निकट उत्तर से दक्षिण की ओर स्थित है।प्रायद्वीपीय भाग की अधिकतर मुख्य नदियाँ जैसे – महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी पूर्व की ओर बहती हैं तथा बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। ये नदियाँ अपने मुहाने पर डेल्टा

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पूर्व तथा सिंधु एवं सतलुज के स्रोत के काफी नजदीक से चेमायुंगडंग हिमनद (तिब्बत) से निकलती है। इसकी लंबाई सिंधु से कुछ अधिक है, परंतु इसका अधिकतर मार्ग भारत से बाहर स्थित है। यह हिमालय के समानांतर पूर्व की ओर बहती है। नामचा बारवा शिखर 7757 meter के पास पहुँचकर यह अंग्रेजी

गंगा नदी तंत्र

गंगा नदी का उद्गम स्थल गंगा नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री हिमनद (Glacier) से निकलती है जहां इसे भागीरथी नाम से जाना जाता है देवप्रयाग में इसमें आकर अलकनंदा नदी आकर मिलती है जिसके बाद इसे गंगा नाम से जाना जाता है इसके बाद यह प्रथम बार हरिद्वार में मैदान में प्रवेश करती है गंगा

सिंधु नदी तंत्र

सिंधु नदी (Indus River) का उद्गम मानसरोवर झील के निकट तिब्बत में है। पश्चिम की ओर बहती हुई यह नदी भारत में जम्मू कश्मीर के लद्दाख जिले से प्रवेश करती है। इस भाग में यह एक बहुत ही सुंदर दर्शनीय गार्ज का निर्माण करती है। इस क्षेत्र में बहुत-सी सहायक नदियाँ जैसे – जास्कर, नूबरा,

भारतीय नदियों का अपवाह तंत्र

भारत के अपवाह तंत्र का नियंत्रण मुख्यतः भौगोलिक आकृतियो के द्वारा होता है। इस आधार पर भारतीय नदियों को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है- हिमालय की नदियाँ  सिंधु नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र प्रायद्वीपीय नदियाँ हिमालय की नदियाँ भारत के दो मुख्य भौगोलिक क्षेत्रों से उत्पन्न होने के कारण

भारतीय मरुस्थल

थार मरुस्थल भारत के उत्तर-पश्चिम में तथा पाकिस्तान के दक्षिण-पूर्व में स्थितहै। भारत थार मरुस्थल का अधिकांश भाग राजस्थान में स्थित है परन्तु कुछ भाग हरियाणा, पंजाब,गुजरात और पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांतों में भी फैला है। इस क्षेत्र में प्रति वर्ष 150 mm से भी कम वर्षा होती है। इस शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र में वनस्पति बहुत कम है। वर्षा ऋतु में ही कुछ सरिताएँ दिखती हैं और

भारत के तटीय मैदान

भारत के तटीय मैदान भारत के तटीय मैदान का विस्तार पश्चिम में अरब सागर के तट (गुजरात) पर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी (पश्चिम बंगाल ) के किनारे स्थित हैं।प्रायद्वीप के पूर्व या पश्चिम में उनके स्थान के अनुसार उन्हें पूर्व तटीय मैदान और पश्चिम तटीय मैदान कहा जाता है। पूर्व तटीय मैदान पश्चिम तटीय मैदान

भारत के प्रमुख पठार

भारत का प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीयए आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था तथा यही कारण है कि यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ

भारत का उत्तरी मैदान

  भारत के उत्तरी मैदान का निर्माण सिंधु , गंगा एवं इनकी सहायक नदियों के द्वारा हुआ है। यह मैदान जलोढ़ मृदा से बना है। लाखों वर्षों में हिमालय के गिरिपाद में स्थित बहुत बड़े बेसिन (द्रोणी) में ( जलोढ़ों नदियों द्वारा लाई गई मृदा ) का निक्षेप हुआ, जिससे इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है। इसका विस्तार 7 लाख वर्ग

भारत का भौतिक विभाजन

भारत को भौगोलिक स्तिथि के पर आधार  निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है हिमालय पर्वत शृंखला (Himalaya Range) उत्तरी मैदान (Northan Plain) प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Pleatue) भारतीय मरुस्थल (Indian Desert) तटीय मैदान (Coastal Plain) हिमालय पर्वत भौतिक विभाजन भारत की उत्तरी सीमा पर विस्तृत हिमालय भूगर्भीय रूप से युवा एवं बनावट के दृष्टिकोण से वलित पर्वत
error: Content is protected !!