Category: Geography

महासागरीय गर्म और ठंडी जलधाराएँ

महासागरीय धाराएँ दो प्रकार के बलों के द्वारा प्रभावित होती हैं- प्राथमिक बल, जो जल की गति को प्रारंभ करता है,  द्वितीयक बल, जो धाराओं के प्रवाह को नियंत्रित करता है। प्राथमिक बल, जो धाराओं को प्रभावित करते हैं, वे हैं सौर ऊर्जा से जल का गर्म होना, वायु,  गुरुत्वाकर्षण  कोरियोलिस बल (Coriolis Force) सौर

ज्वार-भाटा (TIDES & EBB)

चंद्रमा (Moon) एवं सूर्य (Sun) के आकर्षण के कारण दिन में एक बार या दो बार समुद्र तल का नियतकालिक उठने या गिरने को ज्वार-भाटा कहा जाता है। जलवायु संबंधी प्रभावों (वायु एवं वायुमंडलीय दाब) में परिवर्तन के कारण जल की गति को महोर्मि (Surge) कहा जाता है। महोर्मि (Surge) ज्वार-भाटाओं की तरह नियमित नहीं होते। ज्वारभाटाओं  स्थानिक एवं

तरंगें (Waves)

तरंगें (Waves) वास्तव में ऊर्जा हैं, जल नहीं, जो कि महासागरीय सतह के आर-पार गति करते हैं। तरंगों में जल कण छोटे वृत्ताकार रूप में गति करते हैं। वायु जल को ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे तरंगें उत्पन्न होती हैं। वायु के कारण तरंगें महासागर में गति करती हैं तथा ऊर्जा तटरेखा पर निर्मुक्त होती है।

महासागरीय जल की लवणता

प्रकृति में उपस्थित सभी जल में खनिज लवण घुले हुए होते हैं। लवणता (salinity) वह शब्द है जिसका उपयोग समुद्री जल में घुले हुए नमक की मात्रा को निर्धरित करने में किया जाता है , इसका परिकलन 1,000 gram (1 Kg)  समुद्री जल में घुले हुए नमक (ग्राम में) की मात्रा के द्वारा किया जाता है।

महासागरीय जल का तापमान

महासागरीय जल भूमि की तरह सौर ऊर्जा के द्वारा गर्म होते हैं। स्थल की तुलना में जल के तापन व शीतलन की प्रक्रिया धीमी होती है। तापमान का ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज वितरण महासागरीय जल में बढ़ती हुई गहराई साथ-साथ तापमान में भी कमी आती जाती है।  यह सीमा समुद्री सतह से लगभग 100-400 meter नीचे प्रारंभ होती

महासागरीय जल और स्थलाकृति

जल एक चक्रीय (Cyclical)  संसाधन है जिसका पुनः प्रयोग   प्रयोग किया जा सकता है। जल एक चक्र के रूप में महासागर से धरातल पर और धरातल से महासागर तक पहुँचता है। जलीय चक्र, पृथ्वी पर, इसके नीचे व पृथ्वी के ऊपर वायुमंडल में जल के संचलन की व्याख्या करता है। जलीय चक्र करोड़ों वर्षों से

वर्षा के प्रकार

उत्पत्ति के आधार पर वर्षा को तीन प्रमुख प्रकारों में बाँटा जा सकता है- संवहनी वर्षा, (Vascular rain) पर्वतीय वर्षा (Mountain rain) चक्रवाती वर्षा (Cyclone rain) संवहनीय वर्षा (Vascular Rain) हवा गर्म हो जाने पर हल्की होकर संवहन धाराओं के रूप में ऊपर की ओर उठती है, वायुमंडल की ऊपरी परत में पहुँचने के बाद यह विस्तृत होती है

मौसम  और जलवायु – Weather & Climate

मौसम  और जलवायु (Weather & Climate) – वायुमंडल में होने वाला अल्पकालिक परिवर्तन मौसम कहलाता है। मौसम में होने वाला दीर्घकालिक परिवर्तन  जलवायु कहलाता है जिसका प्रभाव एक विस्तृत शेत्र और पर्यावरण पर पढता है। तापमान वायु में मौजूद ताप एवं शीतलता के परिमाण को तापमान कहते हैं। वायुमंडल का तापमान केवल दिन और रात में ही नहीं बदलता बल्कि ऋतुओं

वायुमंडल की संरचना

वायुमंडल अलग-अलग घनत्व तथा तापमान वाली विभिन्न परतों (layers) का बना होता है। पृथ्वी की सतह के पास घनत्व अधिक होता है, जबकि ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ यह घटता जाता है। तापमान की स्थिति के अनुसार वायुमंडल को पाँच विभिन्न भागों में बाँटा गया है जो निम्न है :- क्षोभमंडल (Troposphere) समतापमंडल (Stratosphere,) मध्यमंडल (Mesosphere) आयनमंडल

वायुमंडल का संघटन

वायुमंडल (Atmosphere) अनेक गैस का एक मिश्रण है जिसमे ठोस और तरल पदार्थो के कण असमान मात्र में रहते है हमारे वायुमंडल में मात्रा के अनुसार, शुष्क हवा में 78.09% नाइट्रोजन (Nitrogen) गैस है जो पोधों और जीवो के विकास के लिए महत्वपूर्ण है , 20.95% ऑक्सीजन (Oxygen), 0.93% आर्गन (Argon – Ar), 0.04% कार्बन
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