बिहार की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना

कोसी परियोजना

kosi project

भारत और नेपाल सरकार की यह संयुक्त जल परियोजना है। कोसी परियोजना  के निर्माण के लिए भारत और नेपाल सरकार के मध्य वर्ष 1954 में नेपाल के साथ एक समझौता किया गया, जिसे वर्ष 1961 ई. में पुनः संसोधित किया गया। कोसी परियोजना के निर्माण के प्रमुख उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन, भूमि संरक्षण आदि है। कोसी नदी सर्वप्रथम चतरा गार्ज के पास पर्वत को काटकर मैदान में प्रवेश करती है। कोसी परियोजना में मुख्यत: दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है —

  • पूर्वी कोसी नहर प्रणाली,
  • पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली।

पूर्वी कोसी नहर प्रणाली —

इस नहर प्रणाली से नेपाल एवं बिहार के मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार आदि जिलों में सिंचाई की जाती है। पूर्वी कोसी नहर पर कटैया में 20 मेगावाट क्षमता का विद्युत उत्पादन केंद्र स्थापित है। पूर्वी नहर प्रणाली द्वारा लगभग 5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। पूर्वी कोसी नहर प्रणाली में मुख्य नहर की लंबाई 44 Km है तथा इसकी 4 शाखाएँ हैं  —

  • मुरलीगंज नहर, लंबाई 64 Km
  • जानकीनगर नहर, लंबाई 82 Km
  • पूर्णिया (बनमंखी) नहर, लंबाई 64 Km
  • अररिया नहर, लंबाई-52 Km

पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली —

इस नहर की लंबाई 115 Km है। इस नहर से बिहार के मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर आदि जिलों में सिंचाई की जाती है। पूर्वी नहर प्रणाली द्वारा लगभग 3.25 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है

गंडक परियोजना

गंडक नदी परियोजना बिहार तथा उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। वर्ष 1959 ई. के समझौते के आधार पर नेपाल को भी गंडक परियोजना से लाभ मिल रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत वाल्मीकि नगर (बिहार) में त्रिवेणी घाट नामक स्थान पर बाँध निर्मित किया गया है। यह बाँध बिहार तथा नेपाल में विस्तृत है, इसलिए इसे त्रिवेणी नहर प्रणाली भी कहते हैं। इस परियोजना के अंतर्गत दो मुख्य नहर का निर्माण किया गया है 

पूर्वी त्रिवेणी नहर —

इसे तिरहुत नहर के नाम से भी जाना जाता हैं, इस नहर की कुल लंबाई 293 Km है तथा तिरहुत नहर द्वारा लगभग 6.6 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जाती है। इस नहर द्वारा बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर आदि जिलों में सिंचाई होती है।

पश्चिमी त्रिवेणी नहर —

पश्चिमी त्रिवेणी नहर की कुल लंबाई 200 Km है, जो नेपाल में 19 Km, उत्तर प्रदेश में 112 Km तथा बिहार में 69 Km भाग में विस्तृत है। इस नहर को सारण नहर के नाम से भी जाना जाता हैं तथा इस नहर प्रणाली द्वारा लगभग 4.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जाती है।

नेपाल में गंडक परियोजना के अंतर्गत दो और नहर पूर्वी नेपाल नहर और पश्चिमी नेपाल नहर, स्थित हैं। पश्चिम नेपाल नहर पर सूरजपुरा (नेपाल) में तथा पूर्वी नहर पर वाल्मीकि नगर (नेपाल) में जल विद्युत केंद्र स्थापित है। जिनकी उत्पादन क्षमता 15-15 मेगावाट है।

सोन परियोजना

सोन परियोजना के अंतर्गत वर्ष 1874 ई. में डेहरी के पास बारून नामक स्थान पर बाँध निर्मित किया गया था। इस बाँध की लंबाई 3801 Meter तथा ऊँचाई 2.44 Meter है। डेहरी के पास से सोन नदी से दो नहर निकाली गई हैं —

  • पूर्वी सोन नहर,
  • पश्चिमी सोन नहर।

पूर्वी सोन नहर —

इस नहर की कुल लंबाई 130 Km है, जो वारून से पटना तक विस्तृत है। इस नहर द्वारा औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल और पटना जिले के लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है।

पश्चिमी सोन नहर —

इस नहर द्वारा रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर आदि जिलों के लगभग 3 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर की सिंचाई की जाती है।

सोन नहर प्रणाली पर 2 जल विद्युत केंद्र स्थापित किए गए हैं —

  • डेहरी जल विद्युत केंद्र (6.6 मेगावाट,)
  • बारून जल विद्युत केंद्र (3.3 मेगावाट)

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