वायुदाब पेटियाँ (Air Pressure Belts)

पृथ्वी की सतह पर वायु के भार द्वारा लगाया गया दाब, वायु  दाब कहलाता है। वायुमंडल में ऊपर की तरफ जाने पर दाब (Pressure) तेजी से गिरने लगता है। समुद्र स्तर पर वायुदाब सर्वाधिक होता है  और ऊंचाई पर जाने पर यह घटता जाता है। वायु दाब (Air Pressure) का क्षैतिज वितरण किसी स्थान पर उपस्थित वायु के ताप द्वारा प्रभावित होता है। अधिक तापमान वाले क्षेत्रों में वायु हल्की होकर ऊपर उठती है । यह निम्न दाब क्षेत्र (Low Pressure region)  बनाता है । निम्न दाब, बादलयुक्त आकाश एवं नम मौसम के साथ जुड़ा होता है कम तापमान (Low Temperature) वाले क्षेत्रों की वायु ठंडी होती है। इसके फलस्वरूप यह भारी होती है। भारी वायु संकुचित (Compress) होकर उच्च दाब क्षेत्र (High Pressure region) बनाती है। उच्च दाब के कारण स्पष्ट एवं स्वच्छ आकाश होता है।

वायुदाब पेटियाँ (Air Pressure Belts) 

विषुवतीय प्रदेशों में अधिक गर्मी के कारण हवा अत्यधिक गर्म होकर ऊपर उठती है, इससे विषुवत्तीय निम्न वायुदाब कटिबंध का निर्माण होता है। जो विषुवत रेखा से 10° उत्तर या दक्षिण के अक्षांशों तक विस्तृत है। विषुवतीय वायुदाब कटिबंधों की विशेषताएँ निम्न हैं –

1. अत्यधिक निम्न वायुदाब और शांत वायुमंडल दशाएँ सामान्यत: धरातलीय क्षैतिज पवन यहाँ नहीं चलते हैं क्योंकि इस कटिबंध की ओर वाले पवन इसकी सीमाओं के समीप पहुँचते ही गर्म होकर ऊपर उठने लगते हैं। वायुमंडलीय दशाओं के अत्यधिक शांत रहने के कारण इस कटिबंध को डोलड्रम या शांत कटिबंध कहते हैं।

न्यूनतम तापमान ध्रुवों के ऊपर पाया जाता है जिसके कारण वायुमंडल की ठण्डी और भारी हवा उस क्षेत्र में उतरती है और ध्रुवीय उच्च वायुदाब कटिबंध का निर्माण करती है। यह कटिबंध दोनों ध्रुवों के चारों ओर सीमित क्षेत्रों में ही है।

२. ध्रुवीय उच्च दाब और विषुवतीय निम्न दाब कटिबंधों के मध्य उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंध तथा उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबंध स्थित है।

3. उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंध कर्क और मकर रेखाओं (Cancer and Capricorn Lines) से क्रमशः लगभग 35° उत्तरी और दक्षिणी अक्षाशों तक विस्तृत है। इनका निर्माण वायुमंडलीय हवा के ठण्डी होकर नीचे उतरने और जमा होने के कारण होता है। नीचे उतरती हुई वायु धाराएँ निम्न वायुदाब क्षेत्रों की ओर बहते हुए पवनों में मिल जाती हैं। फलस्वरूप दाब बढ़ जाता है और उच्च दाब का निर्माण होता है। इस उच्च वायुदाब क्षेत्र को अश्व अक्षांश भी कहते हैं।

4. ध्रुवीय उच्च दाब और विषुवतीय निम्न दाब कटिबंधों के बीच उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंध तथा उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबंध स्थित है। ध्रुवीय उच्च दाब पेटियों तथा उपोष्ण दाब पेटियों के बीच उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी पाई जाती है। पृथ्वी के परिभ्रमण के फलस्वरूप दोनों ओर की उच्च दाब पेटियों से आई वायु यहाँ रहती है, अत: निम्न वायुदाब कटिबंध उत्पन्न होता है।

उपर्युक्त वायुदाब पेटियाँ स्थिर न होकर खिसकती भी रहती हैं। सूर्य के उत्तरायण एवं दक्षिणायन होने पर अपनी औसत स्थिति से उत्तर या दक्षिण खिसक जाती हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध में जलभाग की अधिकता के कारण खिसकाव अपेक्षाकृत कम होता है।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *