जीव विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के जनक

जीव विज्ञान की शाखा वैज्ञानिक जन्तु विज्ञान (Zoology / Animal Biology) अरस्तु (Aristotle) आनुवंशिकी विकिरण जी जे मेण्डल आनुवंशिकी एच जे मुलर तुलनात्मक रचना जी क्यूवियर आधुनिक आनुवंशिकी बेटसन जीरोन्टोनोलॉजी वाल्डिमिर कोरनेचेवस्की आधुनिक शारीरिकी एन्ड्रियस विसैलियस चिकित्साशास्त्र हिप्पोक्रेट्स सूक्ष्मजैविकी लुई पाश्चर प्रतिरक्षा विज्ञान एडवर्ड जेनर जीवाणु विज्ञान रॉबर्ट कोच रक्त परिसंचरण विलियम हार्वे रुधिर वर्ग

कोशिका विभाजन (Cell Division)

प्रत्येक जीव का जन्म एककोशीय युग्मज (युग्मनज) से होता है। इन एककोशीय कोशिका का विभाजन होने से शरीर की अन्य कोशिकाओं का निर्माण होता हैं। एककोशीय युग्मज (युग्मनज) का विभाजन हुए बिना इतने प्रकार के ऊतक (tissues) और अंग (Organ) का निर्माण नहीं हो पाता। एककोशीय कोशिका विभाजन दो प्रकार का होता है –  समसूत्री विभाजन (Mitosis),

जीवों के तुलनात्मक अंग

प्रत्येक जीव के अंगों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है – समजात अंग  (Homologous Organs) समरूप अंग  (Analogous Organs) अवशेषी अंग  (Vestigial Organs) समजात अंग (Homologous Organs) –  वह अंग, जो विभिन्न कार्यों के लिए विकसित हो जाने के कारण असमान दिखाई दे सकते हैं, परन्तु मूल रचना एवं भ्रूणीय परिवर्धन में वे समान होते

जैव विकास तथा जैव विकास के सिद्धांत (Bio evolution and theories of Bio evolution)

थियोडोसियस डोबहास्की (Theodosius Dobahsky) के अनुसार जीव विज्ञान (Biology) का अर्थ क्रमिक विकास में है। जैव विकास एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में होने वाला आनुवंशिक (Genetic) परिवर्तन है। पृथ्वी के प्रारंभ से ही निम्नकोटि के जीवों का क्रमिक परिवर्तनों द्वारा निरंतर अधिकाधिक जटिल जीवों की उत्पत्ति वास्तविक रूप से जैव विकास ही है। जैव

पादप कोशिका तथा प्राणी कोशिका में अंतर

प्राणी कोशिका प्राणी कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है। यह केवल प्लाज्मा झिल्ली से घिरी रहती है। इसमें क्लोरोप्लास्ट नहीं होते हैं। सेंट्रोसोम एवं तारक केंद्र होते हैं। यह आकार में छोटी व अनियमित होती है। पादप कोशिका पादप कोशिका में कोशिका भित्ति उपस्थित होती है।पादप कोशिका यह प्लाज्मा झिल्ली के अतिरिक्त, एक मोटी भित्ति से

कोशिका संरचना और कोशिका के अंग

प्लाज्मा झिल्ली (Plasma membrane) यह झिल्ली पदार्थों के भीतर आने या बाहर जाने पर नियंत्रण रखती है। यह झिल्ली प्रोटीन एवं लिपिड की बनी होती है। कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) यह कोशिका के अंदर का तरल पदार्थ है जो पारदर्शी व चिपचिपा होता है। केन्द्रक (Nucleus) कोशिका के मध्य में एक केंद्रक होता है, जो सभी

कोशिका (Cell)

कोशिका जीवन की आधारभूत संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। कोशिका में प्रायः स्वजनन (Self reproduction) की क्षमता होती है। पौधों एवं जीवों में कोशिकाओं की आकृति, माप व संख्याएं भिन्न-भिन्न होती हैं। कोशिका की खोज वर्ष 1665 ई. में रॉबर्ट हुक ने की थी, जबकि कोशिका के सिद्धांत को वर्ष 1838-39 में जर्मनी के दो

सिकंदर लोदी (Sikander Lodi 1489-1517 ई०)

मूल नाम – निजाम खाँ था। माता – जैबन्द (सुनार की पुत्री) राज्यारोहण – 16 जुलाई 1489 ई० निधन  – 21 नवंबर 1517 बहलोल लोदी उसने अपनी मृत्यु से पूर्व  ही सिकंदर लोदी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। बहलोल लोदी के मृत्यु के पश्चात 16 जुलाई 1489 ई० में निजाम खाँ, सिकन्दर लोदी के नाम से सिंहासनारूढ़ हुआ। सैन्य

बहलोल लोदी (Bahlol Lodi 1451-1489 ई०)

लोदी वंश का संस्थापक बहलोल लोदी था, यह वंश दिल्ली सल्तनत का अंतिम राजवंश था। बहलोल लोदी अफगानिस्तान के गिलजाई कबीले के लोदी शाखा के शाहूखेल वर्ग से सम्बन्धित था।  राज्याभिषेक – 19 अप्रैल, 1451 ई० महमूद खिलजी के आक्रमण को विफल कर बहलोल लोदी ने सुल्तान मुहम्मद शाह की विशेष कृपा हुई। बहलोल लोगी की सेवा

इब्राहिम लोदी (Ibrahim Lodi 1517-1526 ई०)

सिकन्दर लोदी की मृत्यु के पश्चात् उसका ज्येष्ठ पुत्र इब्राहिम लोदी 22 नवम्बर, 1517 ई० को शासक बना। यह लोदी वंश का अन्तिम शासक था। 1526 ई० में पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर व इब्राहिम लोदी के मध्य हुआ, जिसमें बाबर विजयी हुआ, और भारत में मुगल वंश की स्थापना की। इब्राहिम लोदी के समय की