विशाखा गाइडलाइन्स – महिलाओं की सुरक्षा के लिए (MeToo)

MeToo कैम्पेन (campaign) के भारत में शुरू होने और बॉलीवुड (Bollywood) से लेकर मीडिया तक फैलने के बाद रोज़ नए नए लोगों के नाम इसमें जुड़ रहे हैं, उत्पीड़न की ज़्यादातर शिकायतें दफ्तरों (Offices) से या काम काम से जुड़े लोगों के लिए हे आ रही हैं, दफ्तरों (Offices) से लेकर फिल्म के सेट तक महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर नियंत्रण के लिए अलग से एक कानून है जिसे ‘विशाखा गाइडलाइन्स (Vishakha Guidelines)’ के नाम से जाना जाता है, ‘विशाखा गाइडलाइन्स‘ के तहत महिलाएं तुरंत शिकायत दर्ज करवा सकती हैं|

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विशाखा गाइडलाइन्स (Vishakha Guidelines)

हर ऐसी कंपनी या संस्थान के हर उस दफ्तर में, जहां 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारी हैं, एक आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) की स्थापना करना अनिवार्य होता है, ICC की अध्यक्ष महिला ही होती है और कमेटी में अधिकांश महिलाओं को रखना भी ज़रूरी होता है| इस कमेटी में यौन शोषण के मुद्दे पर ही काम कर रही किसी बाहरी गैर-सरकारी संस्था (Non-governmental organization – NGO) की एक प्रतिनिधि को भी शामिल करना अनिवार्य होता है|

कंपनी या संस्थान में काम करने वाली महिलाएं किसी भी तरह की यौन हिंसा की शिकायत इस समिति से कर सकती हैं, यह कंपनी की ज़िम्मेदारी होगी कि शिकायत करने वाली या पीड़ित महिला पर पर किसी भी तरह का हमला न हो, या उस पर कोई दबाव न डाला जाए|
समिति को एक साल में उसके पास आई शिकायतों और की गई कार्रवाई का लेखाजोखा सरकार को रिपोर्ट के रूप में भेजना होता है, अगर समिति (Committee) किसी को दोषी पाती है, तो उसके खिलाफ IPC की संबंधित धाराओं के अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई करना भी अनिवार्य होता है|

इसके अर्थ

पिछले कुछ महीनों में बहुत से मामले आए हैं जिनमें महिलाओं ने नाम लेते हुए कहा है कि उन्हें यौन उत्पीड़न (Sexual harassment) का शिकार बनाया गया| कार्यक्षेत्र या अन्य स्थानों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (Sexual harassment) रोकने के लिए कानून हैं, लेकिन इन कानूनों को लेकर जागरूकता नहीं है, इसलिए अपराधियों के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हो पाती है|

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लेकिन स्थिति लगातार बदल रही है. सुप्रीम कोर्ट पहले से ही उन बातों को रेखांकित कर चुका है, जिनका पालन करवाकर किसी भी कार्यस्थल का वातावरण महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया जा सकता है. दफ्तरों में महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा के लिए वर्कप्लेस बिल, 2012 भी लाया गया जिसमें लिंग समानता, जीवन और स्वतंत्रता के अधिकारों को लेकर कड़े कानून बनाए गए हैं. यह कानून कामकाजी महिलाओं को सुरक्षा दिलाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. इन कानूनों के तहत यह रेखांकित किया गया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं, युवतियों के सम्मान को बनाए रखने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं.

गाइडलाइन्स

साल 1992 में हुए राजस्थान के चर्चित भवंरी देवी गैंगरेप केस से इसकी शुरुवात हुई. इस केस के बाद महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के लिए आवाज उठाने वाली संस्था विशाखा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी, भवंरी देवी राजस्थान सरकार के एक कल्याणकारी योजना में कार्यरत थी, उन्होंने जब राजस्थान में बाल विवाह का विरोध किया तो कई लोगों ने उनके साथ रेप किया, सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के मद्देनजर 1997 में जनहित याचिका के जवाब में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश (विशाखा गाइडलाइन्स) दिये और सरकार से कहा है वह जरूरी कानून बनाए, इसके बाद दफ्तरों में होने वाले शोषण की और लोगों का ध्यान गया|

विशाखा गाइडलाइन्स से पहले महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन हिंसा और अन्य हिंसा जैसे अपराधों से निपटने के लिए काफी पुराना कानून था जो 1860 में लागिओ हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर 19 अक्टूबर 2012 को एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते संस्थाओं से कहा था कि वह यौन हिंसा से निपटने के दफ्तर में समितियों का गठन करे. उसके बाद केंद्र सरकार ने अप्रैल 2013 में ‘सेक्शुअल हैरैसमेंट ऑफ विमिन ऐट वर्क-प्लेस ऐक्ट (Sexual Harrassment of Women on Work-Places Act)’ को मंजूरी दे दी|

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 सजा 

सज़ा संगठन के नियमों के अनुसार तुरंत हो सकती है लेकिन अगर संगठन में नियम नहीं हैं तो अनुशंसात्मक कार्रवाई जिसमें लिखित माफी, चेतावनी, पदोन्नति रोकना, वेतन वृद्धि या वृद्धि को रोकना, नौकरी से निकाले जाना शामिल है, इसके अलावा यौन या मानसिक उत्पीड़न के केस में कानूनी कार्यवाई भी होगी|

विशाखा कमेटी

1. यदि किसी महिला पर शारीरिक सम्पर्क के लिए दबाव डाला जाता है या फिर अन्य तरीकों से उस पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है या बनाया जाता है|
2. यदि किसी भी सहकर्मी, वरिष्ठ या किसी भी स्तर के कार्मिक द्वारा उससे यौन संबंध बनाने के लिए अनुरोध किया जाता है या फिर उस पर ऐसा करने के लिए दबाव डाला जाता है|
3. किसी भी महिला की शारीरिक बनावट, उसके वस्त्रों आदि को लेकर भद्दी, अशालीन टिप्पणियां की जाती हैं तो यह भी एक कामकाजी महिला के अधिकारों का हनन है|
4. किसी भी महिला को किसी भी तरह से अश्लील साहित्य या फोटो/वीडियो दिखाया जाता है या ऐसा कुछ करने की कोशिश की जाती है|
5. किसी भी तरह से मौखिक या अमौखिक तरीके से यौन प्रकृति का अशालीन व्यवहार किया जाता है| इन सभी सूरतों में विशाखा कमेटी शिकायत करने वाली महिला की मदद करेगी|

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