सबरीमाला मंदिर विवाद (Sabarimala temple controversy)

चर्चा में क्यों

केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के अपने फैसले में मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिलाएं कहीं से भी पुरषों से कमजोर नहीं हैं। मंदिर में उनके प्रवेश का रोक भेदभाव करने वाला है।

sabarimala mandir kerala

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली  पांच सदस्यीय (जस्टिस आर एफ नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा) संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के बाद एक अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस मंदिर में हर साल November से January तक, श्रद्धालु  अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए भक्त उमड़ पड़ते हैं, क्योंकि बाकि पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है, भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए  मकर संक्रांति का दिन बहुत खास माना जाता है, इसीलिए उस दिन यहां सबसे ज़्यादा भक्त पहुंचते हैं| इस मंदिर में महिलाओं का जाना वर्जित है, खासकर 15 साल से ऊपर की लड़कियां और महिलाएं इस मंदिर में नहीं जा सकतीं, यहां सिर्फ छोटी बच्चियां और बूढ़ी महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं, इसके पीछे मान्यता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे|

कौन थे अयप्पा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार अयप्पा को  भगवान शिव और  मोहिनी (विष्णु जी का एक रूप) का पुत्र माना जाता है, इनका एक नाम  हरिहरपुत्र भी है, हरि यानी विष्णु और हर यानी शिव, इन्हीं दोनों भगवानों के नाम पर हरिहरपुत्र नाम पड़ा| इनके अलावा भगवान अयप्पा को  अयप्पन,  शास्ता,  मणिकांता नाम से भी जाना जाता है, इनके दक्षिण भारत में कई मंदिर हैं उन्हीं में से एक प्रमुख मंदिर है सबरीमाला. इसे  दक्षिण का तीर्थस्थल भी कहा जाता है

क्या है खास:–

यह मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर स्थित है,यह मंदिर चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है, इस मंदिर तक पहुंचने के लिए  18 पावन सीढ़ियों को पार करना पड़ता है, जिनके अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं|

  • पहली पांच सीढियों को मनुष्य की पांच इन्द्रियों से जोड़ा जाता है|
  • इसके बाद वाली 8 सीढ़ियों को मानवीय भावनाओं से जोड़ा जाता है|
  • अगली तीन सीढियों को मानवीय गुण और आखिर दो सीढ़ियों को ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक माना जाता है|

इसके अलावा यहां आने वाले श्रद्धालु सिर पर  पोटली रखकर पहुंचते हैं, वह पोटली नैवेद्य (भगवान को चढ़ाई जानी वाली चीज़ें, जिन्हें प्रसाद के तौर पर पुजारी घर ले जाने को देते हैं) से भरी होती है, यहां मान्यता है कि तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर, व्रत रखकर और सिर पर नैवेद्य रखकर जो भी व्यक्ति आता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं|
यह मंदिर  468 m (1535 ft) ऊंची पहाड़ियों पर स्थित है, इस मंदिर से पांच किलोमीटर दूर पंपा तक कोई गाड़ी लाने का रास्ता नहीं हैं, इसी वजह से पांच किलोमीटर पहले ही उतर कर यहां तक आने के लिए पैदल यात्रा की जाती है| रेल से आने वाले यात्रियों के लिए कोट्टयम या चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन नज़दीक है, यहां से पंपा तक गाड़ियों से सफर किया जा सकता है. पंपा से पैदल जंगल के रास्ते पहाड़ियों पर चढ़कर सबरिमला मंदिर में अय्यप्प के दर्शन प्राप्त होते हैं. यहां से सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट तिरुअनंतपुरम है, जो सबरीमला से 92 किलोमीटर दूर है|

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