भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के प्रावधान – अधिनियम 1955

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नागरिकता प्राप्त करने के लिए भाग – 2 के अतिरिक्त नागरिकता अधिनियम 1955 बनाया गया जिसे अंतिम बार 2011 व 2015 में संसोधित किया गया जिसकी निम्न विशेषताएं है।

जन्म के द्वारा नागरिकता  (Citizenship by Birth)

  •  यदि कोई व्यक्ति 26 जनवरी 1950 के बाद परन्तु 1 जुलाई 1947 से पूर्व भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति जन्म के द्वारा ही भारत का नागरिक होगा ।
  • 1 जुलाई 1947 को या इसके बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता  भारत का नागरिक था।
  • 3 दिसम्बर 2004 के बाद भारत में पैदा हुआ वह कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाता है, यदि उसके माता-पिता भारत के नागरिक हों अथवा यदि एक अभिभावक भारतीय हो और दूसरा अभिभावक उसके जन्म के समय पर गैर कानूनी अप्रवासी न हो, तो वह नागरिक भारतीय या विदेशी हो सकता है।

वंशानुक्रम / रक्त संबंध के आधार पर (On the basis of inheritance / blood relation)

यदि किसी व्यक्ति का जन्म देश के बहार हुआ हो तो उसे वंशानुक्रम के आधार पर भारत की नागरिकता प्राप्त होगी , परंतु शर्त यह होगी कि उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो। उस बच्चे का पंजीकरण भारतीय दूतावास में 1 वर्ष के भीतर करना अनिवार्य है ।  यदि वह ऐसा नहीं करता  उसे अलग से  भारतीय सरकार  से  अनुमति लेनी होगी ।

पंजीकरण द्वारा नागरिकता (Citizenship by Registration)

भारत सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को  जो अवैध प्रवासी ना हो को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने पर नागरिकता दे सकती है इसकी निम्न विधियाँ है —

  • भारतीय मूल के किसी व्यक्ति से विवाह करने पर और आवेदन से पूर्व जो व्यक्ति भारत में 7 वर्ष तक रहा हो , उसे आवेदन करने पर भारतीय नागरिकता दी जा सकती है ।
  • ऐसे व्यक्ति जो भारतीय मूल के है पर स्वयं भारतीय नागरिक नहीं , उन्हें भारतीय नागरिक के आवेदन से पूर्व 7 वर्ष तक भारत में रहना अनिवार्य है ।
  • उन व्यक्तियों के अवयस्क बच्चे जो भारत के नागरिक हैं
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क्षेत्र समाविष्टि द्वारा (By Area coverage)

यदि किसी नवीन क्षेत्र को भारत में शामिल किया जाए तो वहां की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो जाएगी। जैसे – हैदराबाद , जूनागढ़ और 1961 ई0 में गोवा को , 1962 ई0 में पांडिचेरी भारत में शामिल किए जाने पर वहां की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो गई।

नागरिकता की समाप्ति (Termination of citizenship)

नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार नागरिकता की समाप्ति की तीन विधियाँ है –

बर्खास्तगी से (Dismissal)

यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी और देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वयं ही समाप्त हो जायेगी ।

वंचित करने के द्वारा (By Depriving)

भारत सरकार को निम्न विधियों से नागरिको को नागरिकता से वंचित करने का अधिकार है –

  • नागरिक भारत से बहार लगातार 7 वर्षो से में रह रहा हो ।
  • यदि किसी व्यक्ति ने अवैध तरीको से भारतीय नागरिकता प्राप्त की हो ।
  • यदि कोई व्यक्ति देश विरोधी गतिविधयो में संलिप्त हो ।
  • यदि व्यक्ति भारतीय संविधान का अनादर करे ।

स्वैच्छिक त्याग (Voluntary Sacrifice) –

यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता का त्याग कर दे , तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जएगी ।




दोहरी नागरिकता (Dual citizenship)

(Person of Indian Origin – PIO) :

ऐसे व्यक्ति जो भारत की स्वतंतत्रा प्राप्ति से पूर्व या स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद किन्ही और देशो (16 निर्दिष्ट देशों ) में जाकर बस गए , उन व्यक्तियों के लिए भारत सरकार द्वारा दोहरी नागरिकता का प्रावधान PIO योजना के अंतर्गत किया गया है। (पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिको को छोड़कर ) जैसे – सिंगापुर और मॉरीशस में बस गए भारतीय

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OCI (Overseas Citizen of India) :

पुन: नागरिकता संसोधन अधिनियम 2005 के द्वारा  ऐसे व्यक्ति जो भारत की स्वतंतत्रा प्राप्ति से पूर्व या स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद किन्ही और देशो (सभी देशों  के लिए) में जाकर बस गए , उन व्यक्तियों के लिए भारत सरकार द्वारा दोहरी नागरिकता का प्रावधान OCI Card योजना के अंतर्गत किया गया है। (पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिको को छोड़कर ) जैसे – सिंगापुर और मॉरीशस में बस गए भारतीय

दोहरी नागरिकता के प्रावधान –

  • L.M सिंघवी समिति की सिफ़ारिशो के आधार पर प्रथम बार केंद्र सरकार ने नागरिकता संसोधन अधिनियम 2003 में विदेशी भारतीय नागरिकता (दोहरी नागरिकता) का प्रावधान किया  गया । इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर किसी भी अन्य देश में स्वतंतत्रा प्राप्ति से पूर्व या 1950 के बाद के वें नागरिक सम्मिलित है जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर ली।

  •  पुन: नागरिकता संसोधन अधिनियम 2005 के द्वारा भारतीय मूल के विदेशी भारतीय नागरिकता प्रदान करने संबंधी उपबंध है। इसके अंतर्गत OCI योजना के तहत भारतीय मूल के विदेशी व्यक्तियों को OCI Card के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की जा रही है । सर्वप्रथम 26 Jan. 2006 को निवृति राय को प्रथम OCI Card प्रदान किया गया।

  • पुन: नागरिकता संसोधन अधिनियम 2015 के द्वारा विदेशी भारतीय नागरिकता (OCI) संबंधी प्रावधानों को पुन: संसोधित किया गया।भारत सरकार द्वारा नयी योजना भारतीय विदेशी नागरिकता कार्ड होल्डर (Overseas Citizen of Indian Cardholder) के नाम से शुरू की गई , जिसके अंतर्गत PIO Card और OCI Card योजना का विलय कर दिया गया।

 

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