सागरीय पारितंत्र (Marine Ecosystem)

सागरीय पारितंत्र को मुख्यत: 4 भागों में विभाजित किया जा सकता है –

  • खुला समुद्र (Open Sea)
  • बैरियर द्वीप (Barrier Island)
  • तट रेखा (Shorelines)
  • प्रवाल भित्ति (Coral Reef)

marine ecosystem

खुला समुद्र (Open Sea)

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में आहार श्रृंखला सूर्य के प्रकाश , ऑक्सीजन () व कार्बन डाइ-ऑक्साइड  () की सुलभता , लवणता व पोषक तत्वों की उपलब्धता पर निर्भर करती है, क्योकिं गहराई में वृद्धि होने के साथ-साथ सूर्य के प्रकाश की तीव्रता कम हो जाती है तथा 200 meter के बाद सूर्य का प्रकाश पूर्णत: समाप्त हो जाता है

बैरियर द्वीप (Barrier Island)

यह जैव-विविधता का प्रमुख स्रोत्र होते है, इसका निर्माण सागर में मृदा के अवसाद से होता हैयह तटीय क्षेत्र को समुद्री तूफान या सुनामी कहते है,  बैरियर द्वीप स्थल व समुद्रीय पारिस्थितिकी तंत्र के बीच का क्षेत्र होता है | जिसमें समुद्र व स्थल दोनों में रहने वाली प्रजातीयां पाई जाती है |

तट रेखा (Shorelines)

इसे अंतरज्वारीय पारितंत्र (Difference tidal ecosystem) भी कहते है, इसे मुख्यत: दो भागों में विभाजित किया जा सकता है –

  • पथरीले तट
  • रेतीले तट

यह अत्यधिक जैव – विविधता (Biodiversity) वाला क्षेत्र होता है, जो उच्च व निम्न ज्वार क्षेत्र के मध्य पाया जाता है| यह क्षेत्र जलधारा , लवणता , तापमान, आर्द्रता ,पर निर्भर करता है|

प्रवाल भित्ति (Coral Reef)

प्रवाल एक चूना प्रधान जीव है, जो मुख्यत: कठोर रचना वाले खोल (Cover) होते है जिसमें कोमल या मुलायम त्वचा वाले जीव रहते है , यह मुख्यत: उष्ण-कटिबंधीय सागरों में 30°C north से 30°C south के मध्य पाएँ जाते है क्योकिं इनके जीवित रहने के लिए उपयुक्त तापमान 20-21°C होता है |

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प्रवालों के विकास के लिए स्वच्छ जल होना आवश्यक है , क्योकिं अवसादों के कारण प्रवालों के मुख बंद हो जाते है तथा वे मरने लगते है , जब कोई प्रवाल की मृत्यु होती है तो दूसरा कड़ी के रूप में उसी के शरीर पर विकसित हो जाता है, इस प्रकार प्रवाल जीव मरने के बाद एक विशिष्ट प्रकार की रचना बनाते है जो एक दीवार की तरह होती है , इसी दीवार की तरह रचना को प्रवाल भित्ति (Coral Reaf) कहते है |

प्रवाल भित्ति पर खतरे के प्रमुख कारक 

  • प्राकृतिक कारक 
    • एल-निनों (EL-Nino)
    • चक्रवात (Cyclone)
    • रोग (Disease)
    • प्रवाल भित्ति को खाने वाले समुदाय (Coral eating organism)
  • मानवीय कारक 
    • तटीय विकास
    • वैश्विक तापमान में वृद्धि
    • मछली पकड़ने की गलत तथा क्षतिकारी प्रकृति
    • परमाणु परीक्षण
    • प्रदूषण
    • अवसादों में वृद्धि

प्रवाल भित्ति का संरक्षण (Conservation of coral reefs) – ग्लोबल कोरल रीफ मॉनिटरिंग नेटवर्क (Global Coral Reef Monitoring Network- GCRMN) , International Coral reef Initiative (ICRI) को सहायता प्रदान करता है यह ICRI को विभिन्न वैज्ञानिक खोज एवं समन्वय द्वारा कोरल पारितंत्र की सूचना साझा करता है , एवं उसके संरक्षण व प्रबंधन में सहायता करता है |

भारत में प्रवाल भित्ति मुख्यत: 4 क्षेत्रों में पाई जाती है –

  1. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Islands)
  2. कच्छ की खाड़ी (Gulf of Kutch)
  3. मन्नार की खाड़ी (Bay of Mannar)
  4. लक्षद्वीप समूह (Lakshadweep Group)

Note:

प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) – प्रवाल पर निर्भर रहने वाले जीव (रंगीन जूजैन्थिली शैवाल) जब पर्यावरण घटकों के नकारात्मक प्रभाव के कारण उनके ऊपर हट जाते है , तो प्रवाल अपने सफेद रंग में आ जाते है| इस प्रक्रिया को प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) कहते है |

 

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