भारतीय राज्य पुनर्गठन आयोग

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स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में 549 रियासते भारत में शामिल हो गयी आयर बची हुई तीन रियासत (हैदराबाद , जूनागढ़ और जम्मू –कश्मीर) भारत में शामिल होने से मन कर दिया , लेकिन बाद में निम्न तरीको से इन्हें भारत में मिला लिया गया ।

  • हैदराबाद (Hyderabad) – सैन्य कार्यवाही द्वारा

  • जूनागढ़ (Junagadh) – जनमत संग्रह द्वारा

  • जम्मू – कश्मीर (Jammu Kashmir) – विलय पत्र द्वारा

1950 में भारतीय संविधान ने भारत को चार वर्गों में विभाजित किया था ।

  • भाग – क / ( Part-A) –   जहाँ ब्रिटिश भारत में गवर्नर का शासन था ।

  • भाग – ख  / ( Part-A) – 9 राज्य विधानमंडल के साथ शाही शासन ।

  • भाग – ग / ( Part-A) – ब्रिटिश भारत के मुख्य आयुक्त का शासन एवं कुछ में शाही शासन था। इसमें कुल 10 राज्य थे जिसमे केंद्रीकृत शासन था।

  • भाग – घ  / ( Part-A) – इस भाग में केवल अंडमान एवं निकोबार को रखा गया ।

धर आयोग समिति 

भारत की स्वतंत्र के बाद देश में भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग उठने लगी। जून 1948 में भारत सरकार के S.K Dhar की अध्यक्षता में  भाषायी आयोग की नियुक्ति की। आयोग दिसम्बर 1948 में अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमे उसने सिफारिश की कि राज्यों के पुनर्गठन का आधार भाषा के आधार पर न होकर प्रशासनिक सुधार के आधार पर होना चाहिए। इससे राज्यों में अत्यधिक असंतोष फ़ैल गया अत: भारत सरकार ने दिसम्बर 1948 भाषायी प्रांत समिति / जेवीपी समिति का गठन किया।

भाषायी प्रांत समिति / जेवीपी समिति

जवाहरलाल नेहरु, वल्लभ भाई पटेल और पट्टाभिसीतारमैया की अध्यक्षता में दिसम्बर 1948 एक समिति का गठन किया गया जिसे JVP समिति के नाम से भी जाना जाता है । इस समिति ने अप्रैल 1949 में अपनी रिपोर्ट पेश की इसने भी सिफारिश की कि राज्यों के पुनर्गठन का आधार भाषा के आधार पर न होकर प्रशासनिक सुधार के आधार पर होना चाहिए।

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लेकिन इसके विरोध में लम्बा आन्दोलन हुआ और 56 दिन की भूख हड़ताल के बाद कांग्रेसी नेता  पोट्टी श्रीरामुलु का निधन हो गया , जिससे आन्दोलन और ज्यादा बढ़ गया। अत: भारत सरकार को मजबूर होकर अक्टूबर 1953 में भाषा के आधार पहले राज्य के गठन के लिए मजबूर होना पड़ा और मद्रास (Madras) से तेलगु भाषी प्रदेश को अलग कर आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) का गठन किया गया।

फज़ल अली आयोग 

आंध्र प्रदेश के गठन के बाद अन्य राज्यों में भी भाषा के आधार पर नए राज्यों के गठन की मांग बढ़ने लगी। अत: भारत सरकार ने दिसम्बर 1953 में एक फज़ल अली की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया , जिसके तीन सदस्य थे –

  • फज़ल अली (अध्यक्ष)
  • K. M पणिक्कर
  • H N कुंजुरु

फज़ल अली आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1955 में पेश की और इस बात को स्वीकार किया की , राज्यों के पुनर्गठन में भाषा को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए , लेकिन इस समिति ने एक राज्य एक भाषा के सिद्धांत को अस्वीकार कर दिया। राज्य पुनर्गठन के लिए चार महत्वपूर्ण कारक बताए –

  • भारत की अखंडता एवं सुरक्षा का संरक्षण
  • भाषायी और सांस्कृतिक एकरूपता
  • वितीय , प्रशासनिक व आर्थिक तंत्र
  • सभी राज्यों और और पुरे देश में लोगो के कल्याण की योजना का संवर्धन

फज़ल अली आयोग की सलाह पर भारत सरकार द्वारा 7 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1956 द्वारा राज्य पुनर्गठन आयोग (1956) स्थापित किया गया। परिणामस्वरूप 1 नवम्बर 1956 को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशो का गठन किया गया ।

Note : 

1974 में सिक्किम ने भारत में शामिल होने की इच्छा दिखाई , अत: संसद द्वारा 35 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1974 द्वारा सिक्किम (Sikkim) को भारतीय राज्य में शामिल कर लिया गया ।

 

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