अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ – International Court of Justice)

  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ – International Court of Justice) संयुक्त राष्ट्र (UN- United Nations) का प्रमुख न्यायिक अंग है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर द्वारा जून 1945 में स्थापित किया गया था और इसने अप्रैल 1946 में काम करना शुरू किया था।
  • न्यायालय का मुख्यालय द हेग (नीदरलैंड) में शांति पैलेस में है।
  • यह न्यायालय संयुक्त राष्ट्र के छः प्रमुख अंगों में से, एकमात्र ऐसा अंग है जो कि न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में स्थित नहीं है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में न्यायधीश की संख्या

  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायधीश हैं, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा नौ साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं और इनको दुबारा भी चुना जा सकता है|
  • प्रत्येक तीसरे साल इन 15 न्यायधीशों में से पांच दुबारा चुने जा सकते है| न्यायधीशों की नियुक्ति के संबंध में मुख्य शर्त यह होती है
    कि दो न्यायधीश एक देश से नहीं चुने जा सकते हैं|
  • भारतीय जज के तौर पर यहां दलवीर भंडारी हैं. दलवीर भंडारी को ICJ – International Court of Justice में नवम्बर 2017 में दुबारा चुन लिया गया है. आईसीजे में अपने पुन:निर्वाचन के लिए भंडारी और ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड के बीच कांटे की टक्कर थी लेकिन ब्रिटेन ने अपना प्रत्याशी वापस ले लिए था इस कारण भंडारी की जीत पक्की हो गयी थी. भंडारी का कार्यकाल 9 साल का होगा|
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा में भंडारी को 193 में से 183 वोट मिले जबकि सुरक्षा परिषद् में सभी 15 मत भारत के पक्ष में गये| इस चुनाव के लिए न्यूयॉर्क स्थित संगठन के मुख्यालय में अलग से मतदान करवाया गया था|

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का न्याय क्षेत्र

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की मदद इसके एक प्रशासनिक अंग रजिस्ट्री” द्वारा की जाती है . न्यायालय का काम कानूनी विवादों का निपटारा करना और अधिकृत संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशेष एजेंसियों द्वारा उठाए कानूनी प्रश्नों पर राय देना है. यानी इसके दो ख़ास कर्तव्य हैं: अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार यह कानूनी विवादों पर निर्णय लेता है, दो पक्षों के बीच विवाद पर फैसले सुनाता है और संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों के अनुरोध पर राय देता है|
इसकी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच हैं। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-93 में बताया गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य इस न्यायालय से न्याय पाने का हक़ रखते हैं . हालांकि जो देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य नही हैं वे भी इस न्यायालय में न्याय पाने के लिये अपील कर सकते हैं|

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के कार्य के तरीके

  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को अपनी मर्जी के हिसाब से नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है| न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय नियमावली,1978 के अनुसार चलती है जिसे 29 सितंबर 2005 को संशोधित किया गया था|
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में किसी देश का कोई स्थायी प्रतिनिधि नहीं होता है. देश सामान्यतया अपने विदेश मंत्री के माध्यम से या नीदरलैंड में अपने राजदूत के माध्यम से रजिस्ट्रार से संपर्क करते हैं जो कि उन्हें कोर्ट में एक एजेंट के माध्यम से प्रतिनिधित्व प्रदान करता है. आवेदक को केस दर्ज करवाने से पहले न्यायालय के अधिकार क्षेत्र और अपने दावे के आधार पर एक लिखित आवेदन देना पड़ता है. प्रतिवादी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करता है और मामले की योग्यता के आधार पर अपना लिखित उत्तर दर्ज करवाता है|
  • इस न्यायालय में मामलों की सुनवाई सार्वजनिक रूप से तब तक होती है जब तक न्यायालय का आदेश अन्यथा न हो अर्थात यदि न्यायालय चाहे तो किसी मामले की सुनवाई बंद अदालत में भी कर सकता है. सभी प्रश्नों का निर्णय न्यायाधीशों के बहुमत से होता है। सभापति को निर्णायक मत देने का अधिकार है| न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है, उसकी अपील नहीं हो सकती किंतु कुछ मामलों में पुनर्विचार हो सकता है|
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की कार्यप्रणाली काफी जटिल प्रकृति की है जिसमे न्याय पाने के लिए बहुत लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. जटिल न्यायिक प्रक्रिया होने के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय विश्व में कई देशों के बीच पेचीदा मामलों को सुलझाकर शांति स्थापित करा चुका है, शायद यही कारण है कि इसके मुख्यालय का नाम शांति भवन रखा गया है|

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नियुक्त अब तक के भारतीय जज

1. दलवीर भंडारी

1 अक्टूबर 1947 को जन्में जस्टिस दलवीर भंडारी एक ऐसा नाम है जो देश ही नहीं विदेश तक चर्चा में बना है। 2005 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने वाले दलवीर भंडारी वर्तमान में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश के पद आसीन है नवंबर 2017 में दलवीर दूसरी बार 5 साल के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस बने हैं। इसके पहले वह 27 अप्रैल 2012 को इस पद आसीन हुए थे। दो बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस बनने वाले यह दूसरे भारतीय हैं।

ICJ - International Court of Justice

2. नगेंद्र सिंह

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के रूप में दलवीर भंडारी से पहले डॉक्टर नगेंद्र सिंह का नाम है। 18 मार्च 1914 को जन्में नगेंद्र सिंह भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके हैं। 1973 में आईसीजे से जुड़ने वाले नगेंद्र सिंह 1985 में यह अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष के पद पर आसीन हुए। यह दो बार चुने गए।

3. रघुनंदन स्वरूप पाठक

रघुनंदन स्वरूप पाठक भारत के 18वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जाने गए। 25 नवम्बर को जन्में आर एस पाठक यानी कि रघुनंदन स्वरूप पाठक भी कोर्ट ऑफ जस्टिस में चुने गए थे। इन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में 1989 से 1991 तक कार्यभार संभाला था।

4. बेनेगल नरसिंह राव

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम बी एन राव यानी कि बेनेगल नरसिंह राव भी शामिल हैं। 26 फरवरी 1887 को जन्में बेनेगल नरसिंह भारतीय प्रशासनिक अधिकारी, कानून विशेषज्ञ होने के साथ ही राजनीति में भी निपुण थे। 1950 से 1952 तक इन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

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