इच्छा मृत्यु ( Euthanasia )

Euthanasia

इच्छा मृत्यु शब्द यूथेनेसिया (Euthanasia) मूलत ग्रीक (Greek) शब्द से है जिसका अर्थ अच्छी मृत्यु होता है। वर्तमान में इस मुद्दे पर संपूर्ण विश्व में अपने अपने विचारों को लेकर बहस जारी है यह काफी संवेदनशील मुद्दा है और इसमें मेडिकल और सामाजिक दोनों पहलू जुड़े हुए हैं |

विश्व भर में इच्छा मृत्यु की मांग करने वाले लोगों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है मेडिकल साइंस के अनुसार इच्छा मृत्यु किसी की सहायता से आत्महत्या या बिना कष्ट या सहज रूप से मरने को कहा गया है।

निष्क्रिय इच्छा मृत्यु (Passive euthanasia) –

इसके अंतर्गत उन सभी लोगों को शामिल किया जाता है जो लाइलाज बीमारी से ग्रसित है और उसे अत्यंत पीड़ा को सहन कर रहे हैं जिनका कोई इलाज नहीं हो सकता है ऐसे में उन लोगों को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई है । जिसमें मरीज की मंजूरी के बाद में उनको कुछ दवाएं देकर मौत दी जाती है लेकिन यह अभी तक  नीदरलैंड (Netherlands) और बेल्जियम (Belgium) में ही वैध माना है ।

भारत में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने निष्क्रिय इच्छा मृत्यु को कुछ शर्तों के साथ अनुमति प्रदान कर दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि –

1. व्यक्ति को अपनी अंतिम सांस लेने का अधिकार होगा कि वह उसे अपनी अंतिम सांस कब तक लेनी है ।

“लिविंग विल (Living will)” – यह एक लिखित दस्तावेज दस्तावेज होता है इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी एक लिविंग विल के अनुसार लाइलाज या पीड़ादायक बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को चिकित्सक पैनल के सामने इच्छा मृत्यु की अर्जी देनी होगी इसके बाद पैनल के सभी लोग मिलकर लिविंग बिल पर पूरी जानकारी हासिल करेंगे और उसके ऊपर उस मरीज से संबंधित फैमिली मेंबर से उसके बारे में संपूर्ण राय लेंगे इसके बाद ही इस अर्जी को कोर्ट तक पहुंचाया जाएगा ।

2. इसके अंतर्गत ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया गया है जिस की बीमारी का कभी भी इलाज नहीं हो सकता है यह जिनके स्वस्थ होने की कोई चांस नहीं होंगे इस स्थिति में वह व्यक्ति लिखित में अपनी इच्छा मृत्यु की मांग करें तो उसके घर वालों को अथवा डॉक्टर को उसका इलाज रोकने की अनुमति होगी इसमें निम्न तरीके उपयोग किये जायेंगे जैसे कुछ दवाइयां, डायलिसिस और वेंटिलेशन जैसे जीवन रक्षक सपोर्ट को बंद कर दिया जायेगे जिस से उसकी मृत्यु हो जाएगी।

इच्छामृत्यु के 5 प्रकार होते है जो निम्न है –

  1. Voluntary active euthanasia ( स्वैच्छिक इच्छामृत्यु ) : इसके अंतर्गत मरीज की मंजूरी के बाद जानबूझकर ऐसी दवा देना, जिससे उसकी मौत हो जाए। यह केवल नीदरलैंड और बेल्जियम में वैध है।
  2.   Involuntary Active Euthanasia ( अनौपचारिक इच्छामृत्यु ): इसके अंतर्गत मरीज खुद अपनी मौत की मंजूरी देने में असमर्थ हो, तब उसे मरने के लिए दवा देना। यह दुनिया में गैरकानूनी है।
  3.  Passive Euthanasia ( निष्क्रिय इच्छामृत्यु ) : इसके अंतर्गत मरीज की मृत्यु के लिए इलाज बंद दिया जाता है जिस के कारण मरीज की मृत्यु हो जाती है। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने इसी का अधिकार दिया है।
  4.  Active Euthanasia ( सक्रिय इच्छामृत्यु ): ऐसी दवा देना, ताकी मरीज को राहत मिले। पर बाद में मौत हो जाए। यह कुछ देशों में वैध है।
  5.  Assisted Suicide (आत्म हत्या में सहायता ): इसके अंतर्गत मरीज की सहमति के आधार पर डॉक्टर मरीज को ऐसी दवा देते हैं, जिसे खाकर आत्महत्या की जा सकती है।

Active Euthanasia ( सक्रिय इच्छामृत्यु ) और Passive Euthanasia ( निष्क्रिय इच्छामृत्यु ) में अंतर-

  • एक्टिव इच्छामृत्यु में पीड़ित को इंजेक्शन या किसी अन्य माध्यम से मृत्यु दी जाती है जबकि पैसिव इच्छा मृत्यु में पीड़ित व्यक्ति को जीवन रक्षक उपाय जैसे दवाइयां, डायलिसिस और वेंटिलेशन बंद कर दिया जाता है।
  • भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान की है लेकिन एक्टिव इच्छा मृत्यु को गैर कानूनी मना है और इसकी अनुमति प्रदान नहीं की है।

विश्व में इच्छा मृत्यु को मानने वाले देश-

वर्तमान में विश्व के 21 से अधिक देश इच्छा मृत्यु के के समर्थन में है तथा इसके लिए अलग अलग देश में अलग-अलग तरीके से कानून का निर्माण भी किया गया हैवह देश निम्न है।

स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड्स, लक्जमबर्ग, अलबानिया, कोलंबिया, जर्मनी, जापान, कनाडा, बेल्जियम, ब्रिटेन, आयरलैंड, चीन, न्यूजीलैंड, इटली, स्पेन, डेनमार्क, फ्रांस, रोमानिया, फिनलैंड में इच्छामृत्यु का अधिकार है इसके अलावा अमेरिका के 7 और ऑस्ट्रेलिया के एक राज्य में भी इसका कानून है।

भारत में इच्छा मृत्यु से जुड़े हुए मामले-

  •  सबसे पहले दिसंबर 2001 में बीके पिल्लई ने केरल हाईकोर्ट से इच्छा मृत्यु की मांग की थी जिसको भारत में ऐसा कोई कानून ना होने के कारण अनुमति प्रदान नहीं की गई थी।
  •  बिहार पटना के निवासी श्री तारकेश्वर सिन्हा ने 2005में राज्यपाल से याचिका की थी कि उनकी पत्नी कंचन देवी इच्छा मृत्यु दी जाए क्योंकि सन 2000 से बेहोश अवस्था में थी अर्थात कोमा में थी ।
  •  उड़ीसा के काशीपुर निवासी मोहम्मद यूनुस अंसारी ने 2005 में राष्ट्रपति से अपील की थी कि उनके चारों बच्चों को इच्छा मृत्यु जाए क्योंकि वे सभी असाध्य बीमारी से ग्रसित थे और उनके इलाज के लिए उसके पास पैसे नहीं है लेकिन इस अपील को नामंजूर कर दिया गया ।
  •   हैदराबाद के 25 वर्षीय युवक व्यंकटेश ने भी अपनी इच्छा मृत्यु की इच्छा जताई थी कि वह अपनी मृत्यु से पहले अपने सारे अंग दान करना चाहता था लेकिन इसको भी मंजूरी प्रदान नहीं की गई।
  •  27 नवंबर 1973 से असाध्य बीमारी से ग्रसित अरूणा शानबाग लगभग 42 वर्षों तक कोमा में रही जिसके लिए 2009 में पत्रकार और लेखिका पिंकी विरानी ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु के लिए याचिका दाखिल की जिसे 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन कोर्ट ने इस पर निष्क्रिय अवस्था में इच्छा मृत्यु की अनुमति को मंजूरी दे दी थी।

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