शत्रु सम्पत्ति अधिनियम (Enemy Property Act)

enemy property act

भारत को लगभग 200 वर्षों के अंग्रेजी शासन के बाद 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, लेकिन इस आजादी के साथ साथ देश भारत की भूमि से एक हिस्सा अलग हो गया था जिसे पाकिस्तान का नाम दिया गया था, इस बंटवारे में लाखों लोग भारत से पाकिस्तान गए और पाकिस्तान से भारत आये, देश छोड़ने वाले लोगों ने अपनी जमीन, मकान, कम्पनियाँ शेयर और बैंक बैलेंस जैसी मूल्यवान चीजों को भी छोड़ दिया था|

वर्ष 1947 के बंटवारे के अलावा 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी बहुत से लोगों ने चीन और पाकिस्तान की ओर कूंच किया और वहां की नागरिकता ले ली थी| देश छोड़ने वाले बहुत से ऐसे ही भारतीय लोगों ने चीन और पाकिस्तान छोड़ दिया था| चीन और पाकिस्तान ने भारत के लोगों की संपत्तियों को जब्त कर लिया था| इसी कारण भारत सरकार ने भी ऐसा ही कदम उठाया था |

शत्रु सम्पत्ति अधिनियम – 1968 

शत्रु सम्पत्ति अधिनियम,1968 भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसके अनुसार शत्रु सम्पत्ति पर भारत सरकार का अधिकार होगा. शत्रु सम्पत्ति अधिनियम – 1968 ,  पाकिस्तान से 1965  में  हुए युद्ध के बाद पारित हुआ था| इस अधिनियम के अनुसार जो लोग 1947 के विभाजन या 1965 में और 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान चले गए और वहां की नागरिकता ले ली थी, उनकी सारी अचल संपत्ति ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर दी गई थी| उसके बाद पहली बार उन भारतीय नागरिकों को संपत्ति के आधार पर ‘शत्रु’ की श्रेणी में रखा गया, जिनके पूर्वज किसी ‘शत्रु’ राष्ट्र के नागरिक रहे हों|

शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968; शत्रु की संपत्ति की देखभाल और हस्तांतरण का अधिकार संपत्ति के लीगल वारिस या लीगल प्रतिनिधि को देता है.

 शत्रु  सम्पत्ति अधिनियम – 2017  

भारत के राष्ट्रपति ने 7 जनवरी 2016 को शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 में बदलाव के लिए अध्यादेश पारित किया था लेकिन केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजजू ने शत्रु संपत्ति (संशोधन और सत्यापन) विधेयक संसद में पेश किया और इस बिल को राज्य सभा द्वारा 10 मार्च 2017 को पास किया गया था जबकि लोक सभा ने इसे 14 मार्च 2017 को पास कर दिया है|

नए कानून के हिसाब से शत्रु सम्पत्ति की परिभाषा अब बदल गयी है, अब वे लोग भी शत्रु हैं जो भले ही भारत के नागरिक हैं लेकिन जिन्हें विरासत में ऐसी संपत्ति मिली है जो कि किसी पाकिस्तानी नागरिक के नाम है|

इसी संशोधन ने सरकार को ऐसी संपत्ति बेचने का भी अधिकार दे दिया है अर्थात अब शत्रु संपत्ति का मालिकाना हक़ भारत सरकार के पास चला गया है. इसी बदलाब के कारण अब राजा महमूदाबाद की सारी की सारी संपत्ति भारत सरकार की हो गयी हैनए कानून में निम्न मुख्य परिवर्तन किये  गए हैं –

  1.  कस्टोडियन को ऐसी प्रॉपर्टी का मालिक मान लिया गया है और ये 1968 से ही प्रभावी हो गया है|
  2. अब भारत के नागरिक शत्रु संपत्ति को किसी को विरासत में नहीं दे सकते हैं|
  3. अब तक जितनी संपत्तियां बेची जा चुकीं हैं उन्हें गैर कानूनी घोषित करार दिया जा चुका है|
  4. दीवानी अदालतों को अधिकत्तर मामलों में शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों पर सुनवाई का कोई हक़ नहीं होगा|
  5.  शत्रु संपत्ति के मामले की सुनवाई सिर्फ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में ही होगी|
  6.  शत्रु संपत्ति की बिक्री गृह मंत्रालय या कस्टोडियन ऑफ़ एनिमी प्रॉपर्टी ऑफ़ इंडिया (CEPI) की देखरेख में ही की जाएगी|
  7.  अब शत्रु संपत्ति का ट्रान्सफर किसी और को नहीं किया जा सकेगा और यह नियम 1968 के पहले और बाद में हस्तांतरित हुई संपत्ति के ऊपर भी लागू होगा|
  8.  बिक्री द्वारा प्राप्त रकम को वित्त मंत्रालय द्वारा संरक्षित सरकारी खाते में विनिवेश आय के रूप में जमा किया जायेगा|

 भारत में शत्रु संपत्तियां 

यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि भारत में अभी कुल 9,280 शत्रु संपत्तियां हैं अभी तक 6,289 शत्रु संपत्तियों का सर्वे कर लिया गया है और बाकी 2,991 संपत्तियों का सर्वे किया जा रहा है.’ गृह मंत्री ने आदेश दिया कि ऐसी संपत्तियां जिनमें कोई बसा नहीं है, उन्हें खाली करा लिया जाए ताकि जल्द उनकी बोली लगवाई जा सके. भारत में सबसे अधिक शत्रु संपत्तियां पाकिस्तान जाने वाले लोगों की हैं.

देश में सबसे ज्यादा 4,991 संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में ऐसी 2,735 प्रॉपर्टीज हैं और राजधानी दिल्ली में ऐसी 487 संपत्तियां है. इनमें से 126 संपत्तियां उन लोगों की हैं, जिन्होंने चीन की नागरिकता ले ली. चीन के नागरिकों से जुड़ी सबसे अधिक 57 शत्रु संपत्तियां मेघायल में हैं, जबकि 29 पश्चिम बंगाल में हैं और असम में ऐसी 7 संपत्तियां हैं.

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