ISRO, PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल

16 सितंबर को ISRO (Indian Space Research Organisation) ने Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) के जरिए दो ब्रिटिश सैटेलाइट्स को किया| ISRO अभी तक अन्य देशों की कुल 239 सैटेलाइट्स सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर चुका है| इसरो इन सैटेलाइट्स को PSLV  और GSLV के जरिए भेजता है. ये दोनों ही लॉन्च व्हीकल्स हैं, जो ऐसा करने में मदद करते हैं|

 PSLV ( Polar Satellite Launch Vehicle)

pslvPSLV को धरती के ऑब्जरवेशन या रिमोट सेंसिंग सैटेलाइटों को धरती से 600 से 900 किमी की ऊंचाई पर स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है|

इसके जरिए 1750 किलोग्राम तक की सैटेलाइट स्थापित की जा सकती है| ये सैटेलाइट को ध्रुवीय भू-समकालिक कक्षा (Geosynchronous orbit) तक पहुंचाने में सक्षम है| ध्रुवीय भू-समकालिक कक्षा के अलावा पीएसएलवी का इस्तेमाल 1400 किग्रा वजन वाली सैटेलाइटों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Geostationary transfer orbit) में पहुंचाने का काम है|

Stage of  PSLV 

PSLV चार स्टेजों में बंटा हुआ रॉकेट है, इसकी पहली और तीसरी स्टेज में सॉलिड रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल हुआ है. जबकि दूसरी और चौथी स्टेज लिक्विड रॉकेट और इंजन से लैस है, PSLV में इनके अलावा स्ट्रैप्स का इस्तेमाल होता है, जो पहली स्टेज में रॉकेट को ऊंचाई तक ले जाने में ताकत देता है| PSLV को अलग-अलग वर्जन में विभाजित किया गया है, इनमें PSLV-CA, PSLV-G or PSLV-XL शामिल हैं|

 

GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle)

gslv

 

 

ISRO ने  GSLV को मुख्य तौर पर कम्युनिकेशन सैटेललाइट्स लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया है., इनमें वो सैटेलाइट शामिल हैं, जो जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Geosynchronous transfer orbit) यानि 250 * 36000 किमी पर स्थापित की जाती है|

GTO (Geosynchronous transfer orbit) के बाद सैटेलाइट्स को उसके फाइनल मुकाम तक पहुंचाया जाता है. इसमें मौजूद इंजन सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस  अर्थ ऑर्बिट यानि GEO जो 36 हजार किमी ऊंचाई पर पहुंचाती है| अपनी जियो-सिंक्रोनस नेचर के चलते, सैटेलाइट अपनी ऑर्बिट में एक फिक्स पोजिशन में घूमती है, ये धरती से एक नियत स्थान पर दिखाई देती है|

जीएसएलवी के संस्करण (Versions of GSLV)

इसरो ने जीएसएलवी को 2 संस्करण में विभाजित किया है. GSLV  पहला  संस्करण Mk-II है, ये 2500 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Geosynchronous transfer orbit – GTO) तक पहुंचाने में मदद करता है, ये तीन स्टेज पर आधारित लॉन्च व्हीकल है जिसके पहले स्टेज में सॉलिग रॉकेट मोटर, दूसरे स्टेज में लिक्विड फ्यूल और तीसरी स्टेज में क्रायोजेनिक इंजन मौजूद है|

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