Daily Current Affairs 8 feb 2018

पृथ्वी-2 (Prithvi-II)

 

भारत ने 7-feb-2018 ओडिशा में बालासोर जिले के चांदीपुर समेकित परीक्षण रेंज (ITR) से स्वदेशी तकनीक से निर्मित सतह-से-सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-2 का सफल परीक्षण किया। पृथ्वी-2 मिसाइल की मारक क्षमता 350 Km है। इससे पहले भारत ने 18-jan-2018 को अग्नि-5 और 6 feb को अग्नि-1 का भी ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से सफल परीक्षण किया जा चुका है।

मुख्य बिंदु

  • पृथ्वी-2 मिसाइल को अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप)  के एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range) के तीसरे प्रक्षेपण मोबाइल लॉन्चर द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
  • पृथ्वी -2 मिसाइल 500-1000 किलोग्राम हथियार ले जाने में सक्षम है और यह तरल और ठोस दोनों प्रकार के प्रणोदन ( ईंधन) से संचालित होती है। यह जुड़वां इंजनों द्वारा प्रेरित है जिसकी क्षमता 500 से 1000 Kg वज़नी परमाणु आयुध (सामग्री) ले जाने में सक्षम है ।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) व रणनीतिक बल कमान (Strategic Forces Command-SFC) द्वारा इस मिसाइल की लॉन्चिंग प्रक्रिया संपन्न करवाई।
  • इससे पूर्व परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम अग्नि-1 बैलिस्टिक मिसाइल की मारक क्षमता 700 किलोमीटर से अधिक है।

मैक्सिकन एक्सोलॉटल (Mexican Axoltol)

 

वैज्ञानिकों द्वारा किये शोध के अनुसार, मैक्सिकन एक्सोलॉटल (Mexican Axoltol) नामक जीव मेक्सिको की झीलों में पाया जाता है। वैज्ञानिकों  के अनुसार,  यह जीव अपने अंगों के नष्ट हो जाने के बाद उन्हें दोबारा विकसित करने की असाधारण क्षमता रखता है। यह पानी के अलावा ज़मीन पर भी रह सकता है।

मुख्य बिंदु

  • इस जीव में 32 हज़ार मिलियन डीएनए  जोड़े पाए जाते हैं जो मनुष्य के मुक़ाबले दस गुना अधिक हैं।
  • एक्सोलॉटल जीव का अगर कोई अंग नष्ट हो जाता है तो यह हड्डी, नस और माँस के साथ उस अंग को पुनः उसी स्थान परउगाने में सक्षम है।
  • इस जीव में अपनी रीढ़ की हड्डी में लगी चोट को भी सही करने की क्षमता विद्यमान है।
  • इतना ही नहीं अगर रीढ़ की हड्डी टूटी नहीं है तो यह सामान्य तरह से काम भी करता रहता है।
  • एक्सोलॉटल घाव का निशान छोड़े बिना ही यह दूसरे ऊतकों को भी ठीक करने की क्षमता रखता है, जैसे – रेटिना भी।
  • वर्तमान में इस जीव के विलुप्त होने का ख़तरा बना हुआ है, लेकिन यह जीव बहुत आसानी से प्रजनन कर सकता है।
  • एक्सोलॉटल में मनुष्य से भी बड़ा जीन-समूह (जीनोम) पाया जाता है।
  • इसके 32 हजार मिलियन डीएन मनुष्य से भी ज्यादा हैं  जो इंसानों के डीएनए की संख्या से 10 गुना ज्यादा हैं। वैज्ञानिक इसकी खासियत को समझने के लिए पिछले 150 साल से इसके ऊपर अध्ययन कर रहे हैं।
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मिनमाटा कन्वेंशन (Minimata Convention)

minimata convention

मिनमाटा कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए एंथ्रोपोजेनिक उत्सर्जन और यौगिकों संबंधी प्रक्रियाओं को जारी रखने के संबंध में 2025 तक की अवधि निर्धारित की गई है।

मुख्य बिंदु

  • सरकार ने बुधवार को एक संधि के अनुमोदन के प्रस्ताव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारा और उसके यौगिकों से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए करना है।
  • मिनमाटा कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए एंथ्रोपोजेनिक उत्सर्जन और पारा और इसके यौगिकों के उत्सर्जन से बचाना है।
  • मिनमाटा सम्मेलन पारा के हानिकारक प्रभावों से सबसे रक्षा करता है और विकासशील देशों के विकास के क्षेत्र की रक्षा भी करता है।
  • भारत सहित इसके 144 सदस्य हैं। भारत ने 30 सितंबर, 2014 को इस पर हस्ताक्षर किये थे।
  • मिनमाटा सम्मेलन आगे उत्पादों से पारा मुक्त विकल्प और विनिर्माण प्रक्रियाओं में गैर-पारा प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित करने के लिए उद्यमों से आग्रह करेगा। यह अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगा और नवाचार को बढ़ावा देगा।
  • मिनामाटा कन्वेंशन का नाम जापानी शहर मिनामाटा के नाम पर रखा गया है।

पारा प्रदूषण के प्रमुख स्रोत :

रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग, कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप (CFLs) तथा थर्मामीटर जैसे घरेलू उत्पाद, कोयला आधारित ऊर्जा सयंत्र, संदूषित स्थलों सहित पुरानी खानें, लैंडफिल आदि

 

Source :

The Hindu & PIB

http://www.news18.com/news/india/cabinet-nod-to-ratify-minamata-convention-on-mercury-1654107.html

 

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