Daily Current Affairs 20 feb 2018 – PIB, News

सौर मंडल के बाहर 100 नए ग्रहों खोज

वैज्ञानिकों द्वारा हमारे सौरमंडल के बाहर ग्रहों की खोज के लिए केपलर टेलीस्कोप को पहली बार 2009 में लांच किया गया था। वैज्ञानिकों ने करीब 100 नए एक्ज़ोप्लैनेट (ग्रहों) की खोज की गई है। एक्ज़ोप्लैनेट हमारे सौरमंडल के बाहर अन्य तारों की परिक्रमा करने वाले ग्रह होते हैं। खगोलविदों द्वारा नासा के केपलर स्पेस टेलीस्कोप K2 की सहायता से जुटाए गए तथ्यों के बाद इन एक्ज़ोप्लैनेटों की खोज की गई।

मुख्य बिंदु

  • 2013 में आई तकनीकी दिक्कत से यह टेलीस्कोप खराब हो गया था। इंजीनियरों की टीम ने इसमें कुछ बदलाव कर 2014 में फिर से लांच किया।
  • शोधकर्ताओं ने टेलीस्कोप को मिले करीब 275 सिग्नलों का अध्ययन किया। इनमें से 95 की ग्रहों के रूप में पुष्टि हो गई। के2 ने इस मिशन के सबसे चमकीले तारे एचडी 212657 की खोज करने में भी सफलता हासिल की है
  • इस मिशन के तहत केपलर स्पेस टेलीस्कोप के2 द्वारा अब तक 300 ग्रहों की खोज की जा चुकी है। सबसे पहला एक्सोप्लैनेट 1995 में खोजा गया था।
  • सौर प्रणाली के बाहर स्थित सभी ग्रह ‘एक्ज़ोप्लैनेट’ कहलाते हैं।
  • हाल ही में ‘प्रॉक्सिमा सेंटॉरी’ तारे की परिक्रमा करने वाले ग्रह “प्रॉक्सिमा सेंटॉरी बी” की खोज की गई है; जो सूर्य के सबसे नज़दीक का “एक्ज़ोप्लैनेट” है।
  • खोजे गए ग्रहों में कुछ पृथ्वी के बराबर हैं तो कुछ बृहस्पति या उससे भी अधिक बड़े हैं।


महानदी जल विवाद

 

  • नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने महानदी नदी जल विवाद के न्यायिक निपटारे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
  • अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (ISRWD) कानून, 1956 के प्रावधानों के अनुसार न्यायाधिकरण में एक अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य होंगे, जिन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों में से मनोनीत करेंगे।
  •  ISRWD कानून, 1956 के प्रावधानों के अनुसार न्यायाधिकरण को अपनी रिपोर्ट और फैसले तीन वर्ष की अवधि के भीतर देने होंगे
  • न्यायाधिकरण द्वारा विवाद के न्यायिक निपटारे के साथ ही महानदी नदी पर ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच लंबित विवाद का अंतिम निपटारा हो सकेगा।
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गिद्धों की वापसी

भारत जैव विविधताओं से परिपूर्ण देश है, जहां विश्व का 8% भाग समाहित है। सभी जीव एक दूसरे से खाद्य शृंखला द्वारा संबंधित हैं। इनमें से किसी एक का विलुप्त हो जाना, पूरी पारिस्थिति की को प्रभावित करता है। गिद्ध को आहार शृंखला के सर्वोच्च स्थान पर आंका गया है क्योंकि गिद्ध एक मृतोपजीवी पक्षी है, जिसका पाचन तंत्र काफी मज़बूत होने के कारण रोगाणुओं से परिपूर्ण सड़े-गले माँस को आसानी से पचा पाता है।

 

छत्तीसगढ़ के अचानक मार टाइगर रिजर्व के औरापानी बफर जोन में गिद्ध बड़ी संख्या में उड़ान भरते नजर आ रहे हैं।

गिद्धों के फायदे

  • गिद्ध एक मृतोपजीवी पक्षी है, जिसका पाचन तंत्र काफी मज़बूत होने के कारण रोगाणुओं से परिपूर्ण सड़े-गले माँस को आसानी से पचा पाता है। यदि पर्यावरण में गिद्ध न हों तो जंगली पशु-पक्षियों में विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोग फैलने का खतरा काफी बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर  पर्यावरण व खाद्य श्रंखला पर पड़ता है।

गिद्धों के संरक्षण के लिए योजना

  • भारत सरकार द्वारा गिद्धों के संरक्षण के लिये एक एक्ससीटू संरक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत वर्ष 2030 तक भारत में गिद्धों की संख्या में महत्त्वपूर्ण रूप से वृद्धि दर्ज करना है।
  •  गिद्धों के लिये आवश्यक संरक्षित प्रजनन क्षेत्र के साथ-साथ सुरक्षित प्राकृतिक आवास मुहैया कराने जैसी मूलभूत आवश्यकता उपलब्ध करना।
  • वर्तमान में सरकार द्वारा  ऐसे कई प्राकृतिक क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है जहाँ काफी मात्रा में गिद्धों की प्राकृतिक आबादी मौजूद है तथा  इनकी प्रजनन दर में वृद्धि हो रही है।
  • भौरमगढ़ पहाड़ 500 फीट की ऊंचाई पर है। जिस पर ऊंचे पेड़ों सहित एक गुफा भी है। यहां मानव दखलअंदाजी नहीं है। इस वजह से गिद्धों ने यह रहवास नहीं बदला। यहां गिद्ध 50 साल से रह रहे हैं। 1975-76 से इन्हें लगातार देखा जा रहा है। अब इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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विलुप्त होने के कारण

  •  खेतों में रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग व पालतू जानवरों को बीमारियों से बचाने के लिए दी जाने वाली डाइक्लोफेनेक दवा ने गिद्धों को विलुप्ति की कगार पर पहुंचा दिया क्योंकि मृत मवेशी के शरीर से यह रसायन गिद्ध तक पहुंचकर उसकी किडनी पर गंभीर असर करता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है।
  • मानव दखलअंदाजी

 

Source : PIB & Danik Jagran

 

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