Daily Current Affairs 06 august 2018

1. ऊर्जा दक्षता में आंध्र प्रदेश अग्रणी राज्य

Bureau-of-Energy-Efficiency , bee

  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE – Bureau of Energy Efficiency) और नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी राज्यों की ऊर्जा दक्षता तत्परता सूचकांक (States’ Energy Efficiency Preparedness Index – SEEPI) के अनुसार, आंध्र प्रदेश ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।
  • इससे पूर्व ही विश्व बैंक (World Bank) ने आंध्र प्रदेश को ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य का स्थान दिया है, इसके बाद केरल, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र का स्थान आता है|
  • आंध्र प्रदेश ने नगर पालिकाओं, कृषि मांग पक्ष में प्रबंधन तथा घरेलू एवं बिल्डिंग सेक्टर आदि सभी क्षेत्रों में  बेहतर प्रदर्शन करके ऊर्जा दक्षता तत्परता सूचकांक (SEEPI) में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है |

2. भारतीय स्टार कछुआ (Geochelone Elegana)

Indian star tortoise

  • लुप्तप्राय (1,125) भारतीय स्टार कछुए (Indian star tortoise/Geochelone Elegana), जिन्हें तस्करी द्वारा बांग्लादेश ले जाया जा रहा था, को सिटी रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन में जब्त किया गया है।
  • भारतीय स्टार कछुए (Geochelone Elegana) को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ़ नेचर (IUCN-International Union for Conservation of Nature) की लुप्तप्राय प्रजातियों की लाल सूची (Red data list ) में ‘अतिसंवेदनशील’ के रूप में शामिल किया गया है।
  •  भारतीय वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत यह प्रजाति अनुसूची-IV में भी सूचीबद्ध है और विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत इसका आयात निर्यात  प्रतिबंधित है।
  • भारतीय स्टार कछुए भौगोलिक घटना के तीन व्यापक क्षेत्रों में पाए जाते हैं:
    • उत्तर-पश्चिम भारत (गुजरात, राजस्थान), दक्षिण-पूर्वी पाकिस्तान,
    • तमिलनाडु के पूर्वी एवं दक्षिणी भाग
    • आंध्र प्रदेश तथा पूर्वी कर्नाटक से ओडिशा तथा संपूर्ण श्रीलंका|
  • अंतर्राष्ट्रीय मांग को पूर्ण  करने के लिये भारतीय स्टार कछुए (Geochelone Elegana)  का अवैध व्यापार किया जाता है, क्योकिं ‘विदेशों में पालतू जानवर’ के रूप में इसकी अत्यधिक मांग है |
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FOXP-2 जीन 

FOXP2 जीन को मनुष्यों में भाषा के विकास में महत्वपूर्ण  भूमिका के कारण खोजा गया है, हालाँकि यह जीन जानवरों में भी पाया जाता है किंतु  मनुष्य में पाए जाने वाले इस जीन की संरचना में मामूली बदलाव के कारण यह भाषा प्रदान करने में सक्षम है।

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